चंबल मैराथन 12 जनवरी से, तैयारियां चरम पर

चंबल मैराथन 12 जनवरी से, तैयारियां चरम पर

जालौन 9 जनवरी। उत्तर प्रदेश में जालौन के पंचानंद क्षेत्र में जालौन: राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में चंबल संग्रहालय द्वारा आयोजित चंबल मैराथन का पांचवां संस्करण 12 जनवरी को आयोजित किया जाएगा।
     इस अनूठी मैराथन की तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें प्रतिभागियों के जोश और आयोजन की भव्यता ने इसे खास बना दिया है। चंबल मैराथन की शुरुआत सुबह आठ बजे इटावा के डॉल्फिन सफारी, सहसो से होगी और यह पांच नदियों के संगम पंचनद पर समाप्त होगी।
     मैराथन का मार्ग बल्लो गढ़िया, हरके पुरा, चंबल आश्रम हुकुमपुरा, जायघा, मई, और जगम्मनपुर जैसे ऐतिहासिक स्थलों से गुजरते हुए न केवल धावकों को रोमांचित करेगा, बल्कि चंबल क्षेत्र के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व को भी उजागर करेगा। इस आयोजन में औरैया, इटावा, जालौन, भिंड, मुरैना, ग्वालियर, धौलपुर, आगरा और अन्य क्षेत्रों के सैकड़ों धावक भाग लेंगे।
     चंबल संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने बताया कि चंबल मैराथन का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना और चंबल के बीहड़ी गांवों, प्राकृतिक सौंदर्य, और ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। 42.195 किमी की इस मैराथन का रूट इटावा, भिंड, और जालौन जिलों के गांवों और जंगलों से होकर गुजरेगा।
     डॉ राना ने कहा, “ इस आयोजन के माध्यम से धावकों को चंबल अंचल की अनोखी विशेषताओं का अनुभव होगा। यहां की सरसों के पीले फूल, बलखाती नदियां, औषधीय पौधों से भरे जंगल, प्रवासी पक्षियों के झुंड, और मगरमच्छों व डॉल्फिन की अठखेलियां धावकों को एक अलग अनुभव प्रदान करेंगी। बीहड़ों से होकर गुजरने वाले इस मार्ग में प्रतिभागी उन स्थानों को देख सकेंगे, जो कभी डाकुओं और बागियों की शरणगाह हुआ करते थे। मैराथन का अंतिम पड़ाव पंचनद संगम, जहां चंबल, यमुना, सिंध, पहुंज और क्वारी नदियों का मिलन होता है, अपने आप में एक अद्वितीय स्थान है।”
     चंबल मैराथन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है और विभिन्न राज्यों के धावकों में इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। डॉ. राना ने बताया कि इस बार मैराथन को ऐतिहासिक बनाने के लिए कई नई पहल की गई हैं। धावकों को मार्ग में चंबल की खूबसूरती के साथ-साथ इस क्षेत्र की स्थानीय सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिलेगी।
     डॉ. राना ने कहा, “ चंबल मैराथन सिर्फ दौड़ने का कार्यक्रम नहीं है, यह प्रतिभागियों को चंबल की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा से परिचित कराने का प्रयास है।”
      चंबल संग्रहालय ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय से सहयोग की अपील की है। डॉ. राना ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह आयोजन चंबल क्षेत्र के पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों को नई ऊंचाईयों तक ले जाए। इसके लिए प्रशासन और स्थानीय लोगों का सहयोग आवश्यक है।”

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