सफारी में शेरो को गर्मी से राहत दिलाने के लिये मिस्ट तकनीक की मदद

सफारी में शेरो को गर्मी से राहत दिलाने के लिये मिस्ट तकनीक की मदद

इटावा, 20 मई । उत्तर प्रदेश के इटावा सफारी पार्क में भीषण गर्मी से वन्यजीवों, विशेषकर एशियाई शेरों को राहत पहुंचाने के लिए सफारी प्रबंधन ने “मिस्ट तकनीक” का सहारा लिया है। इस तकनीक के जरिए पानी की फुहारों से तापमान कम कर वन्यजीवों को गर्मी से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।इटावा सफारी पार्क के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बुधवार को बताया कि सफारी में एशियाई शेरों की सुरक्षा और देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकता है। वर्तमान में सफारी में 46 एशियाई शेर, 46 तेंदुए, छह भालू तथा बारहसिंघा, सांभर, हिरण और काले हिरण समेत करीब 500 वन्यजीव मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए पर्यटकों के लिए वन्यजीव दर्शन का समय भी बदल दिया गया है और सुबह सात बजे से सफारी खोली जा रही है।

डॉ. पटेल ने बताया कि 47 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहे तापमान के बीच वन्यजीवों को राहत देने के लिए “मिस्ट तकनीक” अपनाई गई है। इसके तहत पाइपलाइन और फव्वारेनुमा उपकरणों के जरिए हवा में पानी की बारीक फुहार छोड़ी जाती है, जिससे तापमान कम होकर लगभग 35 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। यह तापमान एशियाई शेरों के लिए अनुकूल माना जाता है।उन्होंने कहा कि अधिक तापमान में वन्यजीवों को काफी परेशानी होती है, इसलिए सफारी प्रबंधन ने तकनीकी उपायों के जरिए वातावरण को ठंडा रखने की व्यवस्था की है। शेरों और अन्य वन्यजीवों के बाड़ों में नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

सफारी में एशियाई शेरों के लिए छोटे-छोटे तालाब भी बनाए गए हैं, जिनमें शेर पानी में बैठकर गर्मी से राहत लेते नजर आ रहे हैं। वहीं तेंदुओं को पाइप के जरिए नहलाया जा रहा है। इसके अलावा सफारी में विभिन्न स्थानों पर खस की टट्टियां और फूस के छप्पर लगाए गए हैं, ताकि वन्यजीवों को छाया और ठंडी हवा मिल सके। शेरों के ब्रीडिंग सेंटर में एसी और बड़े कूलर भी लगाए गए हैं। खस के पर्दों पर लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे अंदर का तापमान नियंत्रित बना रहे।सफारी प्रबंधन के अनुसार हिरण और अन्य शाकाहारी वन्यजीवों के लिए खुले क्षेत्रों में विशेष छायादार व्यवस्था की गई है। सफारी क्षेत्र में घनी हरियाली और पेड़ों की छांव भी तापमान कम बनाए रखने में मदद कर रही है। लॉयन सफारी के कर्मचारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ शेरों में हांफने जैसी स्थिति देखने को मिलती है, इसलिए उन्हें ठंडा रखने के लिए लगातार विशेष उपाय किए जा रहे हैं, ताकि वे बीमार न पड़ें।

डॉ. अनिल कुमार पटेल ने कहा कि सफारी प्रबंधन लगातार सभी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहा है और वन्यजीवों को गर्मी से राहत देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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