श्री बांके बिहारी मंदिर गलियारे का विधानसभा चुनाव से पहले हो सकता है शिलान्यास

श्री बांके बिहारी मंदिर गलियारे का विधानसभा चुनाव से पहले हो सकता है शिलान्यास

लखनऊ, 22 मई। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार मथुरा जिले के वृंदावन में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए श्री बांके बिहारी मंदिर गलियारे के माध्यम से इस पूरे परिक्षेत्र का विकास करने की कवायद में जुटी हुई है।

शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो श्री बाके बिहारी गलियारे के असली स्वरूप में आने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को यहां की भव्यता और दिव्यता को देखने का मौक़ा मिलेगा। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस हाई प्रोफ़ाइल प्रोजेक्ट का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर सकते हैं।

दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कि सरकार ने ही श्री बांके बिहारी गलियारे के विकास को हरी झंडी दी थी। अब जल्द ही यूपी सरकार की ओर से बांके बिहारी गलियारे का निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है। अरबों रुपये की लागत से बन रहे इस गलियारे का मकसद देश-विदेश से आने वाले अनगिनत भक्तों को आसानी से भगवान बांके बिहारी के दर्शन कराना है।

दरअसल यहाँ का इतिहास जानने वाले बताते हैं कि साल 1864 में श्री श्रीकृष्ण के परम भक्त स्वामी हरिदास ने वृंदावन धाम में बांके बिहारी मंदिर का निर्माण करवाया था। ये मंदिर यूपी के मथुरा में स्थित वृंदावन धाम में स्थित है।

मंदिर में भगवान कृष्ण का ही एक रूप स्थित है। भक्तों का मानना है कि मंदिर में स्थित भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से बांके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं।

दरअसल, साल 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि मंदिर में हर रोज करीब 40-50 हजार लोग आते हैं। वहीं, सप्ताह के अंत में ये संख्या लाखों में पहुंच जाती है।

इस कारण पूरे वृंदावन में भीड़ और भगदड़ जैसी स्थिति होती है। इस दौरान प्रशासन पूरी तरह से फेल हो जाता है और कोई कदम नहीं उठाया जाता। इस लिए याचिका में सरकार को उचित कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

श्री बांके बिहारी मंदिर गलियारे का निर्माण भी काशी विश्वनाथ गलियारे के तर्ज पर ही करवाने की योजना है। 500 करोड़ की लागत से बनने वाले इस गलियारे की मदद से मंदिर और यमुना नदी को जोड़ा जाएगा। भक्त यमुना में डुबकी लगाने के बाद गलियारे की मदद से सीधे मंदिर तक पहुंच सकेंगे।

योगी सरकार द्वारा इस कॉरिडोर का निर्माण करीब 5 एकड़ की भूमि में करवाया जाएगा। इसके साथ ही गलियारे के रास्ते में पड़ने वाले सैकड़ों भवनों और संपत्तियों को मुआवजा देकर उनका अधिग्रहण किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि श्री बांके बिहारी मंदिर गलियारे का निर्माण दो हिस्सों में होगा यानी ऊपरी क्षेत्र और निचला क्षेत्र। 5 एकड़ जमीन पर पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं भी मुहैया करायी जाएंगी जिसका खर्च राज्य सरकारी उठायेगी।

उन्होंने बताया, “ इसमें प्रतीक्षालय, परिक्रमा क्षेत्र, सामान घर, चिकित्सा, शिशु-वीआईपी रूम जैसी कई अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी। गलियारे के बनने के बाद करीब 10 हजार लोग इस मंदिर में एक साथ दर्शन कर सकेंगे। बांके बिहारी मंदिर तक पहुंचने के तीन रास्ते बनाए जाएंगे। एक रास्ता जुगलघाट से सीधा मंदिर, दूसरा रास्ता विद्यापीठ चौराहे से और तीसरा रास्ता जादौन पार्किंग से आएगा।”

वहीं, मथुरा के जिलाधिकारी श्री चन्द्र प्रकाश सिंह ने UNI से बातचीत के दौरान बताया कि सरकार की मंशा के अनुरूप श्री बाके बिहारी मंदिर गलियारे को लेकर काम चल रहा है। इसको लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक 14 सदस्यीय समिति गठित की गई है। जिसके अध्यक्ष सेवानिवृत न्यायाधीश अशोक कुमार हैं । इस समिति की बैठकें समय समय पर होती रहती हैं जिसमे मंदिर के आंतरिक और बाह्य विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है।

श्री सिंह ने कहा, “ श्री बाके बिहारी जी के आंतरिक और वाह्य गलियारे के विकास के लिए 16 हज़ार वर्ग मीटर जमीन अधिग्रहित की जानी है जिसमे से 2 हज़ार वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। बाक़ी जैसे जैसे प्रक्रिया आगे बढ़ रही है उस हिसाब से काम चल रहा है ।“

रजिस्ट्री प्रक्रिया को लेकर ज़िलाधिकारी ने बताया कि जो लोग रजिस्ट्री कराने के लिए प्रशासन से संपर्क करते हैं, उनके दस्तावेजों की जांच कई स्तर पर और कई बार कराई जाती है। इसके पीछे कारण यह है कि कई बार मालिकाना हक़ को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिए एहतियात के तौर पर हम काफ़ी सजग होकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं ताकि मलकाना हक़ को लेकर कोई विवाद न हो।

अधिकारियों की माने तो श्री बांकेबिहारी मंदिर गलियारा बन जाने के बाद यहाँ आम नागरिकों को और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ठीक वैसी ही सुविधाएं मिलेंगी जैसे काशी में बाबा विश्वनाथ धाम गलियारे के बन जाने के बाद हुई है।

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