भारत-बंगलादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम की देखरेख के लिए जल्द ही त्रिपुरा का दौरा करेगी केंद्रीय टीम

भारत-बंगलादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम की देखरेख के लिए जल्द ही त्रिपुरा का दौरा करेगी केंद्रीय टीम

अगरतला, 22 मई। भारत-बंगलादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम की देखरेख के लिए जल्द ही केंद्रीय टीम त्रिपुरा का दौरा करेगी इस दौरे का मकसद भारत-बंगलादेश की सीमा का निरीक्षण करना और वहां लगी कंटीले तारों की बाड़ की मौजूदा स्थिति का जायजा लेना है।राज्य प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यहां बताया कि यह पहल सीमा पर सुरक्षा ढांचे को बेहतर बनाने और उसका आधुनिकीकरण करने के प्रयासों का ही एक हिस्सा है। इस मुद्दे पर हाल ही में पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) के 22वें पूर्ण सत्र के दौरान चर्चा हुई थी और अब केंद्र सरकार की टीम मौके पर जाकर विस्तृत मूल्यांकन करने पर विचार कर रही है। त्रिपुरा और बंगलादेश के बीच की सीमा 856 किलोमीटर लंबी है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह टीम उन इलाकों की पहचान करेगी जहां बाड़ काफी खराब हो चुकी है या उसे नुकसान पहुंचा है। अधिकारी ने बताया कि कई जगहों पर पुरानी हो चुकी कंटीले तारों की बाड़ को बदलने की ज़रूरत है, जबकि कुछ अन्य जगहों पर बाड़ टूट गई है। अधिकारियों ने उन मुश्किल इलाकों की ओर भी ध्यान दिलाया, जैसे कि नदी वाले क्षेत्र और दुर्गम इलाके, जहां बाड़ लगाने के पारंपरिक तरीके कारगर साबित नहीं होते। उन्होंने बताया कि विस्तृत रिपोर्टें ( जिनमें तस्वीरों के रूप में दस्तावेज़ीकरण भी शामिल है) उचित कार्रवाई के लिए पहले ही केंद्र सरकार को भेज दी गई हैं।मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि सीमा सुरक्षा को मज़बूत बनाना, मूल रूप से नशीले पदार्थों की तस्करी की समस्या से निपटने से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि एक मज़बूत सीमा सुरक्षा प्रणाली के बिना, यह समस्या बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि इस तरह की रिपोर्टें हैं कि नशीले पदार्थों को म्यांमार से जुड़े रास्तों के ज़रिए असम और मिज़ोरम होते हुए त्रिपुरा में प्रवेश कराया जाता है और फिर यहां से आगे भेजा जाता है। उन्होंने इस स्थिति को राज्य और राष्ट्रीय, दोनों ही स्तरों पर सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बताया।

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