सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक अवसरों में से एक,निरंतर प्रतिबद्धता, अनुशासित क्रियान्वयन और स्पष्ट रणनीति की जरूरत: नीति आयोग

सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक अवसरों में से एक,निरंतर प्रतिबद्धता, अनुशासित क्रियान्वयन और स्पष्ट रणनीति की जरूरत: नीति आयोग

नयी दिल्ली, 29 मई। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पर नीति आयोग के – फ्रंटियर टेक हब अनुभाग द्वारा देश के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के बारे में तैयार एक रिपोर्ट में कहा कि गया है कि आने वाले दशक में सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक अवसरों में से एक हैं और इसको लेकर निष्क्रियता से आयात निर्भरता बढ़ेगी , रणनीतिक स्थिति कमजोर होगी और मूल्य सृजन के अवसरों का नुकसान होगा।इसमें यह भी कहा गया है कि निरंतर प्रतिबद्धता, अनुशासित क्रियान्वयन और स्पष्ट रणनीति के माध्यम से भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में एक अनिवार्य केंद्र के रूप में अपनी जगह सुनिश्चित कर सकता है। इससे सेमीकंडक्टर क्षमता को दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक लाभ में बदला जा सकेगा।”फ्यूचर ऑफ इंडियाज़ सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री” (भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य) शीर्षक इस रिपोर्ट में इस क्षेत्र के लिए 10-वर्षीय वृहद योजना प्रस्तुत की गयी है। इसका उद्येश्य वैश्विक सेमीकंडक्टर की वैश्विक विनिर्माण श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।

इस रिपोर्ट को शुक्रवार को राजधानी में वित्त और कार्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण और रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जारी किया। इस अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी भी उपस्थित थे।रिपोर्ट में वर्ष 2035 तक 120–150 अरब अमेरिकी डॉलर के सेमीकंडक्टर कारोबार के पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही इसमें सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में प्रमुख प्राथमिकताओं और उभरते अवसरों की पहचान भी की गई है।

इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार करने के लिए भारत सोच-समझकर यह तय करने की सिफारिश की गयी है कि वह किन क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा करेगा और पूंजी, प्रतिभा तथा नीतिगत प्राथमिकताओं का आवंटन किस प्रकार करेगा। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ जहाँ अत्याधुनिक वेफर निर्माण का उन्नत क्षेत्र है उसमें नेतृत्व हासिल करना एक दीर्घकालिक लक्ष्य है, वहीं निकट भविष्य में मझे हुए और कंपाउंड नोड्स ( सेमीकंडक्टर मुल्य श्रृंखला की मिली-जुली कड़ियों ) में मजबूत प्रभुत्व स्थापित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।’

इसमें कहा गया है कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व अल्पकालिक प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए दीर्घकालिक योजना, निरंतर क्षमता निर्माण और भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए समय से पहले निवेश करने की दूरदृष्टि आवश्यक होती है। यह रोडमैप दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी वैल्यू चेन में से एक के लिए उसी दिशा को स्पष्ट करता है। इसमें कहा गया है कि भारत सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण से आगे बढ़कर उसके गहन विकास की ओर अग्रसर हो रहा है।इसमें सिफारिश की गयी है कि देश को घरेलू मांग के लिए आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ एडवांस्ड पैकेजिंग के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन देशों में स्थान बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। साथ ही, भारत को सिलिकॉन कार्बाइड (एसआई-सी) और गैलियम नाइट्राइड (जीए-एन) जैसे वाइड-बैंडगैप पदार्थों का एक महत्वपूर्ण वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनकर वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के केंद्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करनी चाहिए।रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक वेफर प्रतिस्पर्धा में पीछे से दौड़ने के बजाय भारत को अपना अलग मार्ग निर्धारित करना चाहिए—ऐसा मार्ग जो रणनीतिक आत्मनिर्भरता, मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र और वैश्विक अनिवार्यता पर आधारित हो। इस रणनीति के केंद्र में एक मजबूत और अनुशासित विनिर्माण आधार होगा, जो विश्वस्तरीय फैब्रिकेशन पर आधारित होगा और देश की अर्थव्यवस्था तथा रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। इनमें परिपक्व-नोड लॉजिक, स्पेशलिटी एनालॉग एवं मिक्स्ड-सिग्नल चिप्स तथा सिलिकॉन कार्बाइड ( और गैलियम नाइट्राइड जैसे कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स शामिल होंगे। ये भारत के ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, औद्योगिक, दूरसंचार और रणनीतिक क्षेत्रों को शक्ति प्रदान करेंगे तथा यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों का निर्माण भारतीय धरती पर ही हो।

इसमें कहा गया है, ‘ जहाँ तक अत्याधुनिक-नोड क्षमता का प्रश्न है, भारत के लिए सबसे उपयुक्त रणनीति एक चयनात्मक और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की होगी, जो राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हो। साथ ही, भारत को अपनी सबसे बड़ी ताकतों—डिज़ाइन प्रतिभा, उच्च गुणवत्ता वाले कार्यबल तथा सामग्री और रसायन पारिस्थितिकी तंत्र—का अधिकतम लाभ उठाना होगा।ृरिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अपनी क्षमताओं के आधार पर सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और सिस्टम आर्किटेक्चर में वैश्विक नेतृत्वकर्ता, आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (ओएसएटी) और एडवांस्ड पैकेजिंग में शीर्ष तीन गंतव्यों में से एक तथा महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर सामग्रियों, विशेष रूप से वाइड-बैंडगैप और एडवांस्ड पैकेजिंग सामग्रियों का विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसमें सिफारिश की गयी है कि इन क्षेत्रों में भारत को केवल भागीदारी तक सीमित न रहकर वैश्विक मानक तय करने, सप्लाई चेन को आकार देने और दीर्घकालिक वैश्विक निर्भरता उत्पन्न करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

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