नकली हिंदुओं’ से सनातन को खतरा : शंकराचार्य

नकली हिंदुओं’ से सनातन को खतरा : शंकराचार्य

जालौन, 30 मई । उत्तर प्रदेश में जालौन जिले के कोंच नगर में शनिवार को पहुंची 81 दिवसीय “गौमाता-राष्ट्रमाता गविष्टि (गो-रक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा” के दौरान ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ संरक्षण और सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए।उन्होंने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग दोहराते हुए कहा कि गाय को केवल पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान प्राप्त है। शंकराचार्य के प्रथम नगर आगमन पर श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और स्थानीय नागरिकों ने उनका भव्य स्वागत किया। यात्रा के दौरान आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गाय का विशेष महत्व है और सरकार को गाय को पशु सूची से हटाकर “गौमाता” के रूप में मान्यता देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समाज गाय को माता मानता है तो उसके संरक्षण और देखभाल की जिम्मेदारी भी प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जानी चाहिए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह यात्रा केवल गौ संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सनातन मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी अभियान है। उन्होंने कहा कि लोगों को आचरण और व्यवहार के आधार पर धर्म तथा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का आत्ममूल्यांकन करना चाहिए।अपने संबोधन में उन्होंने कुछ राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों पर भी टिप्पणी की तथा कहा कि गौ संरक्षण का विषय केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व का भी है। उन्होंने समाज से गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भारतीय परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। यात्रा के दौरान गौ संरक्षण, सनातन संस्कृति और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई।

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