
नयी दिल्ली, 01 जून। कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की खामियों को देश के शिक्षा इतिहास की सबसे बड़ी संस्थागत विफलता बताते हुए कहा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इसके लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए अन्यथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उन्हें तत्काल हटा देना चाहिए।कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि मोदी सरकार के 12 वर्षों के शासन में देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। सीबीएसई, नीट, यूजीसी-नेट और सीयूईटी जैसे मामलों ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
श्री खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि सीबीएसई ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने से पहले शिक्षकों और विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनियों को नजरअंदाज किया। उनके अनुसार परीक्षण के दौरान दर्जनों तकनीकी कमियां सामने आई थीं, लेकिन इसके बावजूद प्रणाली को जल्दबाजी में लागू कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि हजारों छात्रों को धुंधली, अधूरी अथवा गलत तरीके से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं और बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा स्कैन तथा मैनुअल मूल्यांकन के लिए भेजना पड़ा।उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान तकनीकी मानकों, स्कैनिंग गुणवत्ता और पात्रता संबंधी नियमों को कमजोर किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना था कि डिजिटल प्रणाली में सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां भी सामने आईं, जिनसे छात्रों के डेटा और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि यह संकट केवल सीबीएसई तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में नीट, यूजीसी-नेट, सीएसआईआर-नेट, नीट-पीजी, सीयूईटी, जेईई मेन तथा अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, तकनीकी गड़बड़ियों और प्रशासनिक विफलताओं के कारण करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं।उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार छात्रों की आवाज उठा रहे हैं और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों में जवाबदेही की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार छात्रों की चिंता का समाधान करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है।
श्री खेड़ा ने कहा कि सरकार ने शिक्षा बजट में कटौती की है, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर किया है, शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरे हैं और शिक्षा तथा रोजगार के बीच की खाई को बढ़ने दिया है। उन्होंने कहा कि इन सबका खामियाजा देश के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।उन्होंने सरकार से पूछा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर मिली चेतावनियों की अनदेखी क्यों की गई, टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किसके निर्देश पर किए गए, पात्रता नियमों में संशोधन क्यों किए गए और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही विफलताओं की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाना चाहिए।