अर्थव्यवस्था की स्थिति से घबराई सरकार की निवेश बढ़ाने को अध्यादेश लाने की तैयारी-कांग्रेस

अर्थव्यवस्था की स्थिति से घबराई सरकार की निवेश बढ़ाने को अध्यादेश लाने की तैयारी-कांग्रेस

नयी दिल्ली, 04 जून। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देश की अर्थव्यवस्था सुस्त निवेश, कमजोर मांग और निजी क्षेत्र की निवेश में घटती रुचि जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है और सरकार इन समस्याओं के समाधान के ठोस उपाय करने की बजाय विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को राहत देने के लिए आयकर कानून में संशोधन संबंधी अध्यादेश लाने की तैयारी में है।पार्टी का कहना है कि यह कदम अर्थव्यवस्था की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता इसलिए सरकार को आर्थिक स्थिति को लेकर घबराहट में कदम उठाने के बजाय ठोस उपाय करने की दिशा में पहल कर दीर्घकालिक उपाय करने चाहिए।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि एक समाचार चैनल की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर लगने वाले 12.5 प्रतिशत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स) को समाप्त करने के लिए सरकार आयकर अधिनियम में संशोधन संबंधी अध्यादेश लाने की योजना बना रही है। यह कर दर जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में निर्धारित की गई थी।उन्होंने कहा कि वास्तविक समस्या यह है कि देश में निजी कॉरपोरेट निवेश बेहद कमजोर बना हुआ है। जिन कंपनियों को भारत में निवेश करना चाहिए, वे या तो विदेशों में निवेश कर रही हैं अथवा घरेलू निवेश को टाल रही हैं। उनका दावा है कि कॉरपोरेट मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में निजी कॉरपोरेट निवेश की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

श्री रमेश ने कहा कि अध्यादेश जैसे तात्कालिक कदम केवल सुर्खियां बटोर सकते हैं, लेकिन निजी निवेश में गिरावट के संरचनात्मक कारणों का समाधान नहीं कर सकते। वास्तविक मजदूरी में ठहराव, आय एवं संपत्ति की बढ़ती असमानता, आर्थिक शक्ति के बढ़ते केंद्रीकरण तथा जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग से बने भय के माहौल को उन्होंने इसके प्रमुख कारण बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन से बढ़ते आयात ने घरेलू निवेश की समस्याओं को और बढ़ाया है।उन्होंने कहा कि देश में कॉरपोरेट आय और मुनाफा बढ़ने के बावजूद निवेश का अपेक्षित स्तर नहीं दिख रहा है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहना था कि सरकार को तात्कालिक उपायों के बजाय निवेश, उत्पादन और मांग को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था को स्थायी गति मिल सके।

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