
नयी दिल्ली, 04 जून। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार पेश की।इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी उपस्थित रहे।
फ्लेक्स-फ्यूल कार 20 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक इथेनॉल वाले ईंधन पर चल सकती है। कंपनी ने बताया कि ग्राहकों को ई20 से ई100 तक किसी भी अनुपात के एथेनॉल और पेट्रोल मिश्रण पर वाहन चलाने की सुविधा मिलेगी। मारुति सुज़ुकी ने यह तकनीक अपनी लोकप्रिय वैगन आर में पेश की है, जो भारतीय बाजार में पहले से ही सीएनजी और एलपीजी जैसे वैकल्पिक ईंधनों के विकल्पों के साथ उपलब्ध है।श्री गडकरी ने कहा कि भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, और एथेनॉल जैसे जैव-ईंधन इस निर्भरता को कम करने तथा देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन एथेनॉल की मजबूत और स्थायी मांग पैदा कर सकते हैं, जिससे किसानों, उद्योग और पर्यावरण – सभी को लाभ होगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल अन्य वाहन निर्माताओं को भी अपने फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल बाजार में उतारने और तेल उद्योग को एथेनॉल वितरण की अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रेरित करेगी।श्री पुरी ने कहा कि देश की एथेनॉल यात्रा अब रुकने वाली नहीं है। मौजूदा सरकार ने अपने किसानों को केवल ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन देश के लिए लाभकारी हैं – ये कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करते हैं, विदेशी मुद्रा की बचत करते हैं, उत्सर्जन घटाते हैं और ग्रामीण समृद्धि के नये अवसर पैदा करते हैं।
मारुति सुज़ुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी विभिन्न तकनीकों और ईंधनों पर आधारित वाहन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। तेल आयात में कमी और कार्बन उत्सर्जन घटाने के देश के दोहरे लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड, सीएनजी/सीबीजी और एथेनॉल फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पेश कर रही है।उन्होंने कहा कि देश में एथेनॉल ईंधन का पारिस्थितिकी तंत्र अभी शुरुआती चरण में है। मुख्यधारा में आने के बाद, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन तेल आयात, कार्बन उत्सर्जन और स्थानीय वायु प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ घरेलू मूल्य संवर्धन और किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।