उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में “राजनीतिक विरासत” की होड़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में “राजनीतिक विरासत” की होड़

लखनऊ, 6 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव करीब आते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर “विरासत की राजनीति” फिर चर्चा में है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की चाहत है कि उनके बच्चे सियासत में सक्रिय हों और परिवार की राजनीतिक जमीन को आगे बढ़ाएं।टिकट को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इन नेताओं के बेटे-बेटियों ने जमीनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में बढ़ी उपस्थिति, जनता से सीधा संवाद और सोशल मीडिया पर सक्रियता से साफ है कि वे मैदान में उतरने के लिए कमर कस चुके हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बड़े बेटे पंकज सिंह पहले से विधायक हैं। अब छोटे बेटे नीरज सिंह भी राजनीतिक गलियारों में तेजी से सक्रिय हुए हैं। पिछले कई सालों से नीरज लखनऊ में पिता की अनुपस्थिति में पार्टी कार्यक्रमों और सार्वजनिक मंचों पर प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक भाजपा उन्हें लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट से उतार सकती है, या फिर संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। यूके की लीड्स यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट नीरज सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय हैं और युवाओं के बीच उनकी पकड़ भी मजबूत मानी जाती है ।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बेटे अभिनव सिन्हा भी चुनावी दौड़ में हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उनके नाम की चर्चा थी, लेकिन टिकट नहीं मिला। इस बार गाजीपुर सदर से उन्हें मौका मिलने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है।अभिनव जिले में प्रशिक्षण कार्यक्रमों, स्वच्छता अभियान और पार्टी बैठकों में लगातार नजर आ रहे हैं। गाजीपुर सदर सीट 2022 में भाजपा से संगीता बलवंत ने लड़ी थी, जो अब राज्यसभा पहुंच चुकी हैं। ऐसे में नए चेहरे की तलाश में अभिनव का नाम सबसे ऊपर है। फिलहाल यह सीट सपा विधायक जय किशन साहू के पास है।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बेटे करण महाना भी सक्रिय हुए हैं। बिजनेसमैन और भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य करण ने पिता के क्षेत्र महाराजपुर में हाल में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है।इसी तरह झारखंड के राज्यपाल और भाजपा के वरिष्ठ नेता संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को भी टिकट मिल सकता है। 2024 लोकसभा में उनका नाम चला था लेकिन टिकट नहीं मिला। अब बरेली की बहेड़ी सीट खाली होने से समीकरण उनके पक्ष में दिख रहे हैं। छत्रपाल गंगवार के लोकसभा पहुंचने के बाद भाजपा को यहां नए चेहरे की जरूरत है। मुस्लिम और कुर्मी बहुल बहेड़ी में श्रुति की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

पूर्व भाजपा विधायक बृज भूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह नोएडा में सक्रिय हैं। सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात और सामाजिक मंचों पर मुखरता से वे चर्चा में आईं। नोएडा सिटीजन फोरम की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी वकील, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। हालांकि नोएडा सीट फिलहाल राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह के पास है, इसलिए टिकट की राह आसान नहीं मानी जा रही।कांग्रेस छोड़ भाजपा में आईं रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी भी मैदान में उतरने की कोशिश में हैं। 2022 में लखनऊ कैंट से टिकट की चर्चा थी लेकिन नहीं मिला। बाद में वे सपा के करीब चले गए, पर अब मां चाहती हैं कि वे भाजपा से चुनाव लड़ें। मयंक ने अभी सपा नहीं छोड़ी है, लेकिन रीता बहुगुणा जोशी उनके लिए भाजपा का टिकट तलाश रही हैं। पूर्व सांसद संजय सिंह की बेटी आकांक्षा सिंह, पेशे से सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं ।उन्होंने मां अमीता सिंह के साथ अमेठी में मतदाताओं से संपर्क शुरू कर दिया है। संजय सिंह 2022 में अमेठी से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। अब माता-पिता चाहते हैं कि आकांक्षा उनकी राजनीतिक विरासत संभालें।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट वितरण में भाजपा योग्यता को तरजीह देती रही है, लेकिन इस बार कई दिग्गज परिवारों के दबाव से अंदरूनी मंथन तेज है। किसे मौका मिलता है और किसे संगठन में समायोजित किया जाता है, इसका फैसला चुनावी रणनीति तय करेगा।

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