
लखनऊ, 07 जून । उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना अब बेटियों के जन्म से उच्च शिक्षा तक आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार बन चुकी है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह योजना डीबीटी और डिजिटल व्यवस्था के कारण पारदर्शिता की नई मिसाल बनकर उभरी है।
सरकार का दावा है कि अब तक 27,37,703 बालिकाओं को इसका लाभ मिल चुका है और 674.15 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।
योगी सरकार ने योजना के क्रियान्वयन में तकनीक को पूरी तरह अपनाया है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के जरिए होती है और सहायता राशि पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) तथा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है।
इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और अनियमितताओं पर अंकुश लगा है। समयबद्ध भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था ने योजना के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाया है।
यह सहायता न केवल बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करती है, बल्कि परिवारों पर पढ़ाई-लिखाई का आर्थिक बोझ भी कम करती है।
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इन्दुमती ने कहा कि योजना का बढ़ता दायरा इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार के एजेंडे में महिलाओं और बालिकाओं का सर्वांगीण विकास शीर्ष पर है।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र बालिका लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए सभी जिलों में समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि कन्या सुमंगला केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का भी औजार है।
योजना ने लाखों परिवारों को यह भरोसा दिया है कि बेटी का जन्म अब बोझ नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर का प्रतीक है। योगी के मार्गदर्शन में सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की हर बेटी सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर बने।