टीबी मुक्त भारत अभियान’ में उत्तर प्रदेश की बड़ी उपलब्धि, 77 दिनों में 1.43 लाख टीबी मरीज चिन्हित

टीबी मुक्त भारत अभियान’ में उत्तर प्रदेश की बड़ी उपलब्धि, 77 दिनों में 1.43 लाख टीबी मरीज चिन्हित

लखनऊ, 10 जून । उत्तर प्रदेश में चल रहे 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत पहले 77 दिनों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेशभर में अब तक लगभग 31 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें से 1.43 लाख टीबी मरीजों की पहचान हुई है। विशेष बात यह है कि इनमें 41 हजार से अधिक ऐसे मरीज शामिल हैं, जिनमें टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे, लेकिन जांच में उनके शरीर में टीबी के बैक्टीरिया पाए गए। सभी चिन्हित मरीजों का उपचार प्रारंभ कर दिया गया है।

यह जानकारी अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने 100 दिवसीय अभियान की समीक्षा बैठक के दौरान दी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जांच एवं स्क्रीनिंग से संबंधित आंकड़ों को रियल-टाइम आधार पर ‘निक्षय पोर्टल’ पर अपलोड किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि जिन क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, वहां माइक्रोप्लान को और सुदृढ़ किया जाए, घर-घर संपर्क अभियान चलाए जाएं तथा जन-जागरूकता गतिविधियों को और बढ़ाया जाए। साथ ही, शुक्रवार को आयोजित होने वाली समीक्षा बैठक में सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) की अनिवार्य वर्चुअल उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया।

77 दिनों में अभियान की प्रमुख उपलब्धियां

समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, अभियान के पहले 77 दिनों में प्रदेश में 30 लाख 92 हजार 768 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 1 लाख 42 हजार 661 लोगों को टीबी रोगी के रूप में चिन्हित किया गया, जबकि 41 हजार 57 मरीज ऐसे पाए गए जिनमें टीबी के कोई लक्षण नहीं थे।

प्रदेश में अब तक 26 हजार 722 उच्च जोखिम वाले गांवों, शहरी वार्डों, झुग्गी-बस्तियों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा चुकी है। इन क्षेत्रों में 17 हजार 960 आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन कर व्यापक जांच एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

आयुष्मान आरोग्य शिविरों में मिल रही समग्र स्वास्थ्य सेवाएं

अभियान के तहत आयोजित आयुष्मान आरोग्य शिविर केवल टीबी जांच तक सीमित नहीं हैं। इन शिविरों में हीमोग्लोबिन जांच, रक्तचाप परीक्षण, मधुमेह की स्क्रीनिंग सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे आमजन को समग्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो रहा है।

तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 22 लाख 15 हजार 686 एक्स-रे किए जा चुके हैं। वहीं, मॉलिक्यूलर जांच के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में स्थापित 2,578 सीबी-नाट (CBNAAT) मशीनों के माध्यम से अब तक 6 लाख 5 हजार 275 जांचें की जा चुकी हैं।

जनभागीदारी बनी अभियान की सबसे बड़ी ताकत

अभियान की सफलता में जनभागीदारी को प्रमुख आधार माना जा रहा है। सार्वजनिक उपक्रमों, कॉरपोरेट संस्थानों, निजी क्षेत्र तथा ‘माई भारत’ स्वयंसेवकों के सहयोग से प्रदेशभर में सैकड़ों जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इन प्रयासों के माध्यम से हजारों लोगों तक टीबी के प्रति जागरूकता का संदेश पहुंचाया गया है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग, समय पर जांच, शीघ्र उपचार और समाज की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश टीबी उन्मूलन की दिशा में एक अग्रणी मॉडल के रूप में उभर रहा है

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