भविष्य के लिए तैयार और आत्मनिर्भर सेनाओं लिए ‘एकीकरण’ ‘आत्मनिर्भरता ‘और नवाचार अहम स्तंभ: प्रमुख रक्षा अध्यक्ष

भविष्य के लिए तैयार और आत्मनिर्भर सेनाओं लिए ‘एकीकरण’ ‘आत्मनिर्भरता ‘और नवाचार अहम स्तंभ: प्रमुख रक्षा अध्यक्ष

नयी दिल्ली 11 जून । प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने सेनाओं को भविष्य के लिए तैयार और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘एकीकरण’ ‘आत्मनिर्भरता ‘और नवाचार ( जेएआई) को अहम स्तंभ बताया है।जनरल सुब्रमणि ने गुरुवार को पश्चिमी वायु कमान मुख्यालय का अपना पहला दौरा किया। उन्होंने पश्चिमी कमान के प्रमुख एयर मार्शल जॉर्ज थॉमस से बातचीत की और अधिकारियों को संबोधित किया। जनरल ने सैन्य कामकाज में एकीकरण की भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि सशस्त्र बलों की संचालन क्षमता को बढ़ाने में मानव संसाधन सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल में संचालन बढ़त बनाये रखने के लिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, तेज़ी से स्वदेशी क्षमता का विकास और नवाचार की संस्कृति ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि (जेएआई) फ़्रेमवर्क, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मज़बूत बनाने और एकीकृत युद्ध क्षमता को बढ़ाने के भारत के व्यापक विज़न के अनुरूप है।पश्चिमी कमान भारतीय वायु सेना की सबसे अहम संचालन कमानों में से एक है, जो भारत के पश्चिमी और उत्तरी हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार है। यहां स्थित इसका मुख्यालय पाकिस्तान और चीन के साथ संवेदनशील सीमाओं पर हवाई अभियानों को देखने के साथ-साथ हवाई सुरक्षा, निगरानी, रणनीतिक एयरलिफ़्ट और युद्ध की तैयारी में अहम भूमिका निभाता है।

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि सशस्त्र बल ‘थिएटरलाइज़ेशन’ और थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर एकीकरण की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। इसमें ‘एकीकरण’ भारत के सैन्य सुधार के एजेंडे का एक मुख्य स्तंभ बनकर उभरा है, जिसका मकसद सेनाओं के बीच तालमेल, संसाधनों के इस्तेमाल और ऑपरेशनल क्षमता को बेहतर बनाना है।

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