
वॉशिंगटन, 12 जून। विश्व बैंक ने अपनी नवीनतम वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाते हुए चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का आर्थिक प्रभाव क्षेत्र से कहीं आगे तक फैल रहा है और दुनिया भर के देशों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।गुरुवार को जारी ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स ( विश्व की आर्थिक संभावनाएं) शीर्षक रिपोर्ट के ताजा संस्करण में विश्व बैंक ने वर्ष 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो एक वर्ष पहले 2.9 प्रतिशत थी। वहीं, वैश्विक मुद्रास्फीति (महंगाई) औसतन 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो कई अर्थव्यवस्थाओं में जारी मूल्य दबावों को दर्शाती है।
यह संशोधित अनुमान ऐसे समय में आया है जब कि ईरान युद्ध से ऊर्जा की लागत बढ़ी है और इसका असर वैश्विक बाजारों में दिखाई दे रहा है। ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई बढ़ रही है और इस बात का जोखिम भी बढ़ गया है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखें या महंगाई को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीतियों को और सख्त करें।
विश्व बैंक ने यह भी चेतावनी दी कि विकासशील देश इस संकट का सबसे अधिक भार उठा रहे हैं, क्योंकि उन्हें बढ़ती आयात लागत, कमजोर विकास संभावनाओं और सार्वजनिक वित्त पर बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
इस प्रभाव को कम करने के लिए संस्था ने कहा कि वह विकासशील देशों के लिए तत्काल 60 अरब डॉलर के बराबर वित्तीय संसाधन उपलब्ध करा रही है। मांग और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार यह राशि अगले 15 महीनों में बढ़कर 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट में गत जनवरी के पिछले आकलन के बाद से लगभग दो-तिहाई देशों की आर्थिक वृद्धि संबंधी संभावनाओं को संशोधित कर नीचे किया गया है। विश्व बैंक ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, जारी संघर्ष और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता निवेश, व्यापार और उपभोक्ता विश्वास पर लगातार नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।
संस्था के मुख्य अर्थशास्त्री इंडरमिट गिल ने कहा कि संघर्षों को समाप्त करना आर्थिक संभावनाओं को बेहतर बनाने के सबसे प्रभावी उपायों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि अक्सर युद्ध से दूर होने के बावजूद अक्टर कमजोर और गरीब देश ही उससे सबसे गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं।
उन्होंने कहा: “सबसे पहला काम यूक्रेन, खाड़ी क्षेत्र और मध्य अफ्रीका में चल रहे संघर्षों को समाप्त करना है और कोई नया युद्ध शुरू नहीं करना है।कहीं भी होने वाला युद्ध, दुनिया भर के गरीब लोगों के लिए नुकसानदायक होता है।”