
नयी दिल्ली, 13 जून। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ कार्यकर्ता राम माधव ने पड़ोसी देश नेपाल को भारत के लिए एक बड़ी अहमियत वाला देश बताते हुए उसके साथ एक स्वतंत्र और बराबरी वाले देश के रूप में व्यवहार पर देखने की पुरजोर सिफारिश की है।उन्होंने नेपाल में युवाओं के आंदोलन के बाद बनी नयी सरकार को नेपाल की जन भावना की उत्पत्ति बताते हुए उसका पूरा सम्मान करने भू-राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उससे अच्छे सहयोगपूर्ण संबंध रखने पर बल दिया है। आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री माधव ने एक टीवी समाचार चैनल के परिचर्चा कार्यक्रम में भाग लेते हुए बंगलादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध में खुद को ‘बिग ब्रदर’ (विधाता) नहीं बल्कि ‘बड़े भाई’ की भूमिका में रखना चाहि।
श्री राम माधव ने कहा, ‘… याद रखें, वे संप्रभु देश हैं, चाहे वह बांग्लादेश हो या नेपाल. संप्रभु समानता एक ऐसा सिद्धांत है जिसका हमें पालन करना चाहिए।” उन्होंने कहा , ” भारत को कभी भी ‘बिग ब्रदर’ की भूमिका निभाने के बारे में सोचना नहीं चाहिए, अगर जरूरत हो, तो ‘बड़े भाई’ (अभिभावक या मार्गदर्शक) की भूमिका निभानी चाहिए।उन्होंने कहा, ‘ नेपाल एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है, हमारा हिमालयी पड़ोसी, यह हमारे और चीन के बीच एक तरह का ‘बफ़र स्टेट’ है. इसलिए हम उस देश को बहुत अहमियत देते हैं. लेकिन मैं कहूंगा कि उसे एक आज़ाद और बराबरी वाले देश के तौर पर देखें।” उन्होंने कहा कि नेपाल जैसे देश के साथ सांस्कृतिक और सभ्यतागत मूल्यों की वजह से हमारे रिश्तों सहज बनते हैं पर उनके साथ संबंध एक संप्रभु देश के रूप में समानता के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि देश छोटा है या बड़ा, या वह किसी पर निर्भर है या स्वतंत्र, संप्रभु समानता के सिद्धांत के साथ हम अपने पड़ोस के देशों के साथ जुड़ते हैं, जिसमें नेपाल भी शामिल है।उन्होंने कहा कि आज नेपाल में एक नया नेतृत्व आया है, युवाओं पर आधारित नेतृत्व. नया नेतृत्व, जो एक नया नेपाल बनाने के लिए सचमुच बहुत महत्वाकांक्षी है, भारत को खुशी-खुशी इसका स्वागत करना चाहिए। वहां के नेतृत्व का फ़ैसला उस देश की जनता का है, इसलिए हमें उस फ़ैसले का सम्मान करना चाहिए।
श्री राम माधव ने कहा कि नेपाल में जब ‘जेन ज़ी’ के आंदोलन हो रहे थे, तो भारत में अनुमान लगाये जा रहे थे कि क्या उसके पीछे सीआईए या किसी और की साज़िश है? श्री माधव ने कहा, ‘ मैं हमेशा कहता था कि कृपया लोगों का सम्मान करें. अगर किसी देश में लोगों को अपनी सरकार से कोई शिकायत है और वे उसके ख़िलाफ लड़ रहे हैं, तो आप दिल्ली में बैठकर यह नहीं कह सकते कि यह सीआईए की साज़िश है, आईएसआई की साज़िश है, या कुछ और. सबसे पहले, वहां के लोगों की भावनाओं का सम्मान करें।