
कटक, 07 अगस्त । भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सोमवार को उड़ीसा उच्च न्यायालय से श्री जगन्नाथ मंदिर की आंतरिक दीवार की आवश्यक मरम्मत और निर्माण के लिए रत्न भंडार खोलने की प्रार्थना की।
पुरातत्व सर्वेक्षण के पुरी सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् दिबिशादा ब्रजसुंदर गार्नायक ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत एक हलफनामे में कहा कि एएसआई के पत्र और तकनीकी समिति की सिफारिश के अनुसार श्री रत्न भंडार के संरक्षण , मरम्मत एवं रखरखाव के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
राष्ट्रीय स्मारक घोषित 12वीं सदी का श्रीजगन्नाथ मंदिर वर्तमान में एएसआई की देखरेख और संरक्षण में है।
श्री गार्नायक ने कहा है कि भगवान श्री जगन्नाथ के श्री रत्न भंडार में आभूषणों की सूची की तैयारी एवं निगरानी के लिए ओडिशा के राज्यपाल या उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च शक्ति समिति गठित करने के लिए संबंधित पक्षों को आवश्यक निर्देश जारी किया जाना चाहिए।
मंदिर का रत्न भंडार आखिरी बार वर्ष 1984 में खोला गया था और एएसआई ने अनुरोध किया है कि इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा निरीक्षण करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि यह आकलन किया जा सके कि इसके रखरखाव, मरम्मत की भी आवश्यकता है या नहीं।