
वॉशिंगटन, 17 जून । अमेरिका के वार्ताकार ईरान के साथ हुए समझौते के मसौदे को जल्द से जल्द जारी करने का प्रयास कर रहे हैं , हालांकि अमेरिकी प्रशासन के अधिकारी इस समझौते के शब्दों को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं।दोनों देशों के बीच सहमति से तैयार यह समझौता पत्र (एमओयू) जानबूझकर व्यापक रूप में रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बड़े विवादों को सुलझाना नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे की विस्तृत बातचीत का माहौल तैयार करना है। अधिकारियों ने इस दस्तावेज को संक्षिप्त राजनीतिक ढांचा बताया है, जो केवल करीब डेढ़ पन्ने का है।
अधिकारियों का तर्क है कि सबसे महत्वपूर्ण बातें इस मसौदे में नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच गुप्त वार्ता में तय हुई हैं। इन चर्चाओं से अमेरिका को भरोसा मिला है कि ईरान अगले चरण की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ रियायतें देने के लिए तैयार हो सकता है। समझौते में मोटे तौर पर कहा गया है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत होगा।सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी में संवर्धित परमाणु सामग्री को नष्ट करने जैसे उपायों पर चर्चा करने की निजी तौर पर इच्छा जतायी है।
अगर भविष्य की बातचीत में प्रगति होती है, तो इस ढांचे में ऐसे प्रावधान हैं, जो अंततः ईरान को 300 बिलियन डॉलर (25.10 लाख करोड़ रुपये) के प्रस्तावित विकास कोष तक पहुंच दे सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का इस पर जोर है कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे से इस कार्यक्रम का वित्तपोषण नहीं किया जायेगा। इसके अलावा इस समझौता पत्र के प्रभावी होने पर ईरान प्रतिबंधों में छूट के माध्यम से तेल और पेट्रोकेमिकल का निर्यात फिर से शुरू कर सकेगा।अमेरिकी अधिकारियों का साफ कहना है कि ईरान को मिलने वाली कोई भी वित्तीय राहत उसकी शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी। यह व्यवस्था ‘काम के आधार पर’ होगी। ईरान को लाभ तभी मिलेगा, जब वह अपने परमाणु दायित्वों को पूरा करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बनाये रखेगा।
इस दस्तावेज के सार्वजनिक न होने के कारण डोनाल्ड ट्रंप के कुछ सहयोगियों ने इसकी कड़ी आलोचना की है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले हस्ताक्षर समारोह से पहले इस समझौते को एक साथ जारी करने का अनुरोध किया है। इसमें एक बड़ा कारण ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की भूमिका है, जिन्होंने इस ढांचे को अस्थायी मंजूरी दे दी है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि इस दस्तावेज को आखिरी में जारी किया जायेगा। औपचारिक बातचीत शुक्रवार से शुरू होने और शुरुआती 60 दिनों की अवधि तक चलने की उम्मीद है, जिसका मुख्य उद्देश्य यह देखना होगा कि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाने के लिए कितना तैयार है।