मेरे लिए परिणाम नहीं, तैयारी मायने रखती है : गुरनूर

मेरे लिए परिणाम नहीं, तैयारी मायने रखती है : गुरनूर

लखनऊ, 18 जून । आईपीएल में बेंच पर बैठा तेज़ गेंदबाज़, जिसने शिकायत नहीं की। उसने कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, आशीष नेहरा और इशांत शर्मा को देखकर सीखा, तैयारी पर भरोसा रखा और जब भारत के लिए मौक़ा मिला तो सिर्फ़ स्पीड नहीं, बल्कि सोच, प्लानिंग और निरंतर सुधार की भूख से अपनी पहचान बनाई। गुरनूर बराड़ की सबसे बड़ी ताकत उनकी 140 किमी/घंटा की रफ़्तार नहीं, बल्कि यह विश्वास है कि ‘परिणाम नहीं, तैयारी मायने रखती है’ और ‘मैं अच्छा कर सकता हूं।’ अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ लगातार दूसरे वनडे में गुरनूर ने तीन विकेट हासिल किए हैं। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में उन्होंने अपनी गति और लेंथ से काफ़ी प्रभावित किया। ख़ास तौर से उनके बाउंसर और यॉर्कर काफ़ी तीखे थे जिनका जवाब अफ़ग़ानिस्तान के बल्लेबाज़ों के पास नहीं था। गुरनूर ने अपनी लंबाई का पूरा लाभ लेते हुए लगातार शॉर्ट गेंदों से बल्लेबाज़ों को बैकफ़ुट पर धकेला। मैच के बाद पोस्ट मैच प्रेस कॉन्फ़्रेंस में गुरनूर ने साफ़ कहा कि वह अपनी गति या लोगों की उम्मीदों के बारे में ज़्यादा नहीं सोचते।उन्होंने कहा, “मुझे खुद पर पूरा भरोसा है और मेरा सारा ध्यान बस इस बात पर रहता है कि अपनी तरफ़ से तेज़ हार्ड लेंथ गेंदें डालूं। इसके बाद नतीजा जो भी हो, मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरी तैयारी मेरे लिए सबसे ज़रूरी है, और यह देखना कि मैं रोज़ाना उस चीज़ को दोहरा पा रहा हूं या नहीं। मैं अभी और बेहतर करना चाहता हूं। मुझे मालूम है कि मुझमें इससे भी अच्छा करने की क्षमता है। आज मैंने जैसी गेंदबाज़ी की है, मैं उससे भी बेहतर कर सकता हूं। उम्मीद है कि आगे आने वाले मैचों में आपको मेरा और भी अच्छा खेल देखने को मिलेगा।”

गुरनूर को 2025 सीज़न से पहले हुई मेगा नीलामी में गुजरात टाइटंस ने 1.30 करोड़ रूपये की कीमत में ख़रीदा था। यह फ्रेंचाइजी इसलिए भी उनके लिए काफ़ी अहम थी क्योंकि इसके कप्तान उनके ही राज्य के शुभमन गिल हैं। दो सीज़न जीटी के साथ बिताने के बावजूद गुरनूर को एक भी मैच खेलने का मौक़ा नहीं मिला। हालांकि, वह इससे निराश नहीं हुए बल्कि उन्होंने इसे सीखने के एक अच्छे मौक़े के रूप में भुनाया। उन्होंने बताया कि ड्रेसिंग रूम में अनुभवी सीनियर खिलाड़ियों और हेड कोच से लगातार सीखने का मौक़ा मिला।

उन्होंने कहा, “हर खिलाड़ी का मन करता है कि उसे मौक़ा मिले। मैं भी अपने मौक़े का इंतज़ार कर रहा था। लेकिन साथ ही मैं ये भी सीख रहा था कि वो कहां गलतियां कर रहे हैं, कहां अच्छा कर रहे हैं। मेरे लिए यही था कि मैं कितना और सीख सकता हूं। आईपीएल की जगह मुझे भगवान की कृपा से इंडिया में ही मौक़ा मिल गया। “

गुरनूर ने माना कि रणजी ट्रॉफ़ी से इंडिया ए तक का सफर बेहद अहम रहा। स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण पूरा 2023-24 सीज़न मिस करने वाले गुरनूर ने शानदार वापसी करते हुए 2024 में शेरे पंजाब टी 20 कप में 22 विकेट चटकाए और सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ रहे। 2024-25 रणजी ट्रॉफ़ी सीज़न में सात मैचों में 26 विकेट लेकर वह पंजाब के लिए सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ रहे। बांग्लादेश के ख़िलाफ़ टेस्ट से पहले चेन्नई में उन्हें टीम इंडिया के साथ नेट गेंदबाज़ के रूप में जोड़ा गया था। उसी साल उन्हें इंडिया ए में जगह मिली और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ दो मैचों में आठ विकेट चटकाए।

गुरनूर के मुताबिक़ नई गेंद के साथ उनकी पहली प्राथमिकता स्विंग होती है। उन्होंने कहा, “नई गेंद की जो यूनिवर्सल लेंथ होती है, वहां से आउटस्विंग अच्छी होती है और हर बल्लेबाज़ को दिक्कत होती है। यदि स्विंग कम हो गया तो मैं अपनी लेंथ पीछे खींच लेता हूं। बल्लेबाज़, विकेट और मैच की परिस्थिति के हिसाब से लेंथ बदलता रहता है। मेरे हिसाब से यॉर्कर पर तो हर एक तेज़ गेंदबाज़ को काम करना ही चाहिए। मैं भी डेथ बॉलिंग पर काम करता हूं कि मैं कितने अच्छे यॉर्कर डाल सकता हूं क्योंकि अंत में वही काम आएंगी, स्पेशली अच्छे हिटर्स के ख़िलाफ़।”

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