नौसेना के बेड़े में रविवार को शामिल होंगे तीन युद्धपोत

नौसेना के बेड़े में रविवार को शामिल होंगे तीन युद्धपोत

नयी दिल्ली 19 जून। देश में ही बने अग्रिम पंक्ति के तीन युद्धपोतों दुनागिरि, संशोधक और अग्रय को रविवार को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया जायेगा। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक ऐतिहासिक समारोह में इन युद्धपोतों को नौसेना के बेड़े में शामिल करेंगे।भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किये गये तथा कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित ये पोत समुद्री युद्ध, जलसर्वेक्षण तथा पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता से लैस होंगे। सामूहिक रूप से ये नौसेना के संतुलित क्षमता-विकास दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जो गहरे समुद्री अभियानों को सुदृढ़ करने, समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने तथा तटीय जलक्षेत्रों को उभरते खतरों से सुरक्षित रखने में सहायक हैं।

दुनागिरि, परियोजना 17ए का पाँचवाँ स्टेल्थ फ्रिगेट है जो उन्नत हथियारों और सेंसरों से सुसज्जित है, जिनमें ब्रह्मोस सतह-से-सतह पर वार करने में सक्षम प्रक्षेपास्त्र तथा मध्यम दूरी की सतह-से-वायु प्रक्षेपास्त्र प्रणाली शामिल हैं। इससे नौसेना की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।संशोधक, बड़े सर्वेक्षण पोतों की श्रेणी का चौथा पोत है। इसे तटीय तथा गहरे समुद्री जलसर्वेक्षण, रक्षा एवं नागरिक उपयोगों के लिए समुद्र विज्ञान तथा भूभौतिकीय आँकड़ों के संग्रह के लिए डिजाइन किया गया है। यह स्वायत्त जलमग्न वाहनों तथा दूरस्थ संचालित वाहनों सहित उन्नत सर्वेक्षण प्रणालियों से सुसज्जित है।

अग्रय, अर्नाला श्रेणी के पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों का चौथा पोत है। यह हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट प्रक्षेपक तथा उथले जल के सोनार तंत्रों से सुसज्जित है, जो तटीय जलक्षेत्रों में जलमग्न खतरों का पता लगाने और उनसे मुकाबला करने में सक्षम हैं।ये तीनों प्लेटफॉर्म स्वदेशी जहाजनिर्माण तंत्र की बढ़ती परिपक्वता को प्रदर्शित करते हैं, जिनमें स्वदेशी सामग्री 75 प्रतिशत से अधिक है। इनके निर्माण में भारतीय उद्योग की व्यापक भागीदारी रही, जिसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम शामिल थे, तथा इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पर्याप्त रोजगार सृजित हुआ।

इन युद्धपोतों का नौसेना में शामिल किया जाना आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने तथा भारत की समुद्री क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार, नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्डों, निजी उद्योग तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के संयुक्त प्रयासों को रेखांकित करता है।

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