
नयी दिल्ली, 19 जून । भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजस्थान में पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) आधारित टोलिंग प्रणाली शुरू की है।आधिकारिक सूचना के अनुसार यह प्रणाली राष्ट्रीय राजमार्ग-48 स्थित दौलतपुरा टोल प्लाजा पर लागू की गई है। एमएलएफएफ प्रणाली के तहत बिना किसी बैरियर और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के वाहनों से टोल शुल्क स्वतः वसूला जाएगा, जिससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा और यातायात निर्बाध बना रहेगा। एनएचएआई अब शाहजहांपुर और मनोहरपुर टोल प्लाजा को भी इसी प्रणाली में परिवर्तित करने की योजना बना रहा है, जिससे व्यस्त दिल्ली-जयपुर मार्ग पर आवागमन और अधिक सुगम हो सकेगा।
एनएचएआईप का कहना है कि यह प्रणाली ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक और फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली का एकीकृत उपयोग करती है। इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी के माध्यम से नागरिकों के जीवन को आसान बनाने और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना है।इससे पहले एनएचएआई गुजरात में सूरत-भरूच खंड के चोरयासी टोल प्लाजा तथा दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-द्वितीय (यूईआर-द्वितीय) पर मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर भी एमएलएफएफ प्रणाली शुरू कर चुका है। इस प्रणाली के लागू होने से प्रतीक्षा समय समाप्त होने, ईंधन की बचत और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी आने के साथ ही टोल संचालन की दक्षता में भी सुधार हुआ है।
प्राधिकरण ने वाहन चालकों से फास्टैग खातों में पर्याप्त शेष राशि बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि अपर्याप्त शेष राशि, अमान्य अथवा निष्क्रिय फास्टैग की स्थिति में उपयोगकर्ताओं को ई-नोटिस जारी किया जाएगा। ऐसे मामलों में वाहन मालिकों को 72 घंटे के भीतर सामान्य टोल शुल्क का भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान नहीं करने पर संबंधित वाहन श्रेणी के लिए दोगुना शुल्क वसूला जाएगा।
एनएचएआई के अनुसार ई-नोटिस का भुगतान और शिकायत दर्ज कराने की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध है। लगातार भुगतान नहीं करने की स्थिति में फास्टैग को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है तथा वाहन संबंधी अन्य सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। प्राधिकरण का कहना है कि एमएलएफएफ प्रणाली से टोल संग्रह व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, भौतिक टोल प्लाजा स्थापित करने और उनके संचालन से जुड़े खर्चों में कमी आएगी तथा देशभर में टोल संचालन की समग्र दक्षता में सुधार होगा।