एसजीपीजीआई में दो बच्चों के दुर्लभ कैंसर का सफल उपचार

एसजीपीजीआई में दो बच्चों के दुर्लभ कैंसर का सफल उपचार

लखनऊ, 21 जून । लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटी विभाग ने दो बच्चों में पाए गए दुर्लभ और जटिल कैंसर का सफल उपचार कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है। जटिल सर्जरी के बाद दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

संस्थान की ओर से रविवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार पहला मामला अयोध्या निवासी 10 माह के एक शिशु का था, जिसके पेट में बढ़ती हुई गांठ की शिकायत थी। जांच में उसे हेपेटोब्लास्टोमा नामक लिवर कैंसर होने की पुष्टि हुई। यह ट्यूमर लिवर के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से को प्रभावित कर चुका था और शरीर की प्रमुख रक्त वाहिकाइन्फीरियरवेनाकावा(आईवीसी) के अत्यंत निकट स्थित था, जिससे शल्यक्रिया चुनौतीपूर्ण बन गई थी।

विशेषज्ञों ने पहले शिशु को चार चक्र कीमोथेरेपी दी। इसके बाद लगभग छह घंटे तक चली जटिल सर्जरी में ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया।

दूसरा मामला प्रयागराज निवासी 11 वर्षीय बालक का था, जो पेट दर्द, बुखार, पीलिया और फीके रंग के मल की शिकायत के साथ संस्थान पहुंचा था। जांच में अग्न्याशय(पैंक्रियास) के सिर में बड़ा ट्यूमर पाया गया, जो पित्त नली को दबाकर पीलिया और बार-बार संक्रमण का कारण बन रहा था। बायोप्सी में यह ट्यूमर एसपीईएन(एसपीईएन) पाया गया, जो बच्चों में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।

इसके बाद चिकित्सकों ने लगभग आठ घंटे तक चली जटिल व्हिपल सर्जरी (पीपीपीडी) कर ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटा दिया।

दोनों सर्जरियों का नेतृत्व पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटी विभाग के अध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार ने किया। सर्जिकल टीम में डॉ. तरुण कुमार, डॉ. शुचि और डॉ. आनंद शामिल थे। हेपेटोब्लास्टोमा की सर्जरी के दौरान लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट के डॉ. राहुल और डॉ. यश का भी विशेष सहयोग रहा। एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ. शिल्पी और उनकी टीम ने एनेस्थीसिया प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।

प्रो. बसंत कुमार ने बताया कि बच्चों में कैंसर के मामले अपेक्षाकृत कम होते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसे जटिल मामलों की पहचान बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे के पेट में बिना दर्द की गांठ, लगातार पेट दर्द, पीलिया, बार-बार बुखार या वजन न बढ़ने जैसी समस्याएं दिखाई दें तो उसे तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों में होने वाले जटिल कैंसरों का उपचार ऐसे विशेष केंद्रों पर कराया जाना चाहिए जहां बाल शल्य चिकित्सा, बाल कैंसर चिकित्सा, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, लिवर सर्जरी, एनेस्थीसिया और गहन चिकित्सा जैसी सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों।

प्रो. कुमार ने इन सफल उपचारों का श्रेय संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के.धीमन के मार्गदर्शन और सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि एसजीपीजीआई में बच्चों के जटिल कैंसर के उपचार के लिए आधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों की टीम और बहु-विषयक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

उन्होंने बताया कि दोनों बच्चे वर्तमान में स्वस्थ हैं और नियमित फॉलो-अप में अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह उपलब्धि बाल कैंसर उपचार के क्षेत्र में एसजीपीजीआई की विशेषज्ञता और उन्नत चिकित्सा सेवाओं का प्रमाण है।

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