
वॉशिंगटन, 20 जून । अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर (डीएनआई) के रूप में सुश्री तुलसी गबार्ड ने अपने पद पर आखिरी दिन बड़ा कदम उठाते हुए कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़े करीब 400 पन्नों के गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है और पूर्व मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फौसी पर गंभीर आरोप लगाया है।सुश्री गबार्ड ने एक्स’ पर एक नोट के साथ वीडियो जारी कर दावा किया है कि इन नये दस्तावेजों से साफ होता है कि डॉ. फौसी ने अमेरिकी करदाताओं के लाखों डॉलर चीन की वुहान लैब में खतरनाक वायरस या बैक्टीरिया की प्राकृतिक क्षमताओं को बढ़ाने (गेन-ऑफ-फंक्शन) के अनुसंधान के लिये दिये थे।
सुश्री तुलसी गबार्ड ने आरोप लगाया कि डॉ. फौसी ने अपनी इस चूक और ‘वुहान लैब-लीक’ से जुड़े सबूतों को छिपाने के लिए खुफिया विभाग के राजनीतीकरण का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि डॉ फौसी ने खुफिया तंत्र के कुछ हिस्सों के साथ मिलकर इस सच को दबाया और वर्ष 2024 में अमेरिकी संसद में शपथ लेकर भी झूठ बोला था।सुश्री गबार्ड ने अमेरिकी जनता के लिए ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ओडीएनआई) की वेबसाइट पर इन गोपनीय सामग्रियों को जारी किया है।
ओडीएनआई के जारी प्रेस नोट और रिपोर्टों के अनुसार, इन दस्तावेजों में खुफिया अधिकारियों, वैज्ञानिकों और व्हिसलब्लोअर्स की गवाहियां शामिल हैं। कुछ व्हिसलब्लोअर्स ने यह भी आरोप लगाया है कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने ‘लैब-लीक थ्योरी’ का समर्थन किया था, उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके करियर को नुकसान पहुंचाया गया। डॉ. फौसी हालांकि पहले इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर चुके हैं और उन्होंने संसद में कहा था कि नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) ने वुहान में ऐसी किसी खतरनाक अनुसंधान को फंड नहीं किया था।सुश्री तुलसी गबार्ड के इस कदम से अमेरिका में कोरोना महामारी की शुरुआत और खुफिया एजेंसियों की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।