जीएसटी को व्यवसाय जगत का पूरा समर्थन, कर रिफंड व्यवस्था में और सुधार की दरकार: डेलॉयट सर्वे

जीएसटी को व्यवसाय जगत का पूरा समर्थन, कर रिफंड व्यवस्था में और सुधार की दरकार: डेलॉयट सर्वे

नयी दिल्ली, 23 जून । देश के कारोबार जगत में माल और सेवा कर (जीएसटी) को समय के साथ लगभग सर्वत्र समर्थन प्राप्त हो चुका है और अब कारोबारी चाहते हैं कि जीएसटी सुधार के अगले चरण में इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) तथा रिफंड के फार्मूलों को और बेहतर किया जाए ताकि उनकी वर्किंग कैपिटल ( रोजमर्रा के कारोबार की पूंजी) का प्रवाह बेहतर हो। यह बात कंसल्टेंसी कंपनी डेलॉयट के एक सर्वेक्षण ” जीएसटी @ 9 सर्वेक्षण” में सामने आयी है।पहली जुलाई 2017 को लागू हुई इस नयी कर व्यवस्था के 9 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस अवसर पर लघु एवं मझोले उद्यमों सहित विभिन्न क्षेत्र के उद्योगों के बीच कराये गये इस सर्वे पर डेलॉयट के इस सर्वे में कहा गया है कि 99 प्रतिशत से अधिक ने इस जीएसटी को लेकर सकारात्मक या तटस्थ भावना व्यक्त की है। इसके प्रति नकारात्मक भाव रखने वाले उद्यमों का अनुपात घटकर लगभग शून्य हो गई है जबकि पिछले साल के सर्व में 5 प्रतिशत और 2022 में 10 प्रतिशत इकाइयां जीएसटी के विरोध में थीं।

वस्तु और सेवा कारोबार में कर-पर-कर से होने वाले दुष्प्रभाव को समाप्त करने, विभिन्न प्रकार के करों के चलते होने वाली उलझनों को खत्म करने और कारोबार की आसानी के लिए यह नयी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली पहली जुलाई 2017 को लागू की गयी। इसमें केंद्र और राज्य स्तरीय विभिन्न करों को समाहित कर दिया गया। सर्वे में 69 प्रतिशत इकाइयों ने अनुपालन के डिजिटलीकरण को इसकी सबसे बड़ी सफलता बताया है। लेकिन वर्किंग कैपिटल का अनुकूलन (67 प्रतिशत), रिफंड में देरी (77 प्रतिशत), आईटीसी विवाद (57 प्रतिशत) और ऑडिट में राजस्व-समर्थित दृष्टिकोण (65 प्रतिशत) को अब भी इस प्रणाली की मुख्य चुनौती बताया गया है।विज्ञप्ति के मुताबिक 87 प्रतिशत व्यवसायों को लगता है कि जीएसटी के अंतर्गत अधिक व्याख्यात्मक स्पष्टता प्रदान करने की जरूरत है।इसी तरह 36 प्रतिशत इकाइयां रिफंड में अधिक शीघ्रता तथा ऑडिट प्रक्रिया का सरलीकरण चाहती हैं।

ऑडिट के संबंध में, एक से अधिक राज्यों में काम करने वाले व्यावसायिक संगठनों के लिए समन्वित ऑडिट एक प्रमुख सिफारिश के रूप में उभर कर आया है। इकाइयां ऑडिट-टू-नोटिस कन्वर्जन (आडिट में कमी पर नोटिस जारी होने) के अनुपात को कम करने के लिए ऑडिट के दौरान राजस्व-समर्थित दृष्टिकोण से बचने हेतु मार्गदर्शन की मांग की गई है।सर्वे रिपोट में कहा गया है कि सूक्ष्म,लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की इकाइयां तेजी से तिमाही कर विवरण जमा करने की व्यवस्था अपना रही हैं, और इसे शीर्ष जीएसटी पहल मान रहे हैं। यह जीएसटी योजना के कार्यान्वयन के लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया में भारी वृद्धि से सिद्ध होता है। वर्ष 2023 में तिमाही रिटर्न का समर्थन 12 प्रतिशत ने किया था । यह बढ़कर 2026 में 67 प्रतिशत हो गया है।

एमएसएमई सहित आठ उद्योगों के नेताओं के 1,096 प्रतिभागियों के जवाबों पर आधारित इस सर्वेक्षण में जीएसटी के प्रति बढ़ता विश्वास अनुपालन के डिजिटलीकरण के ( 69 प्रतिशत) कर प्रक्रियाओं का ऑटोमेशन (54 प्रतिशत) और ई-इनवॉइसिंग व ई-वे बिल प्रणालियों का स्थिरीकरण (48 प्रतिशत) के प्रति सकारात्मक राय के रूप में प्रदर्शित होता है। प्रणाली में पारदर्शिता, निरंतरता और व्यापार करने में आसानी को लेकर अधिकांश इकाइयां सकारात्मक राय रखती है।विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि प्रौद्योगिकी-आधारित प्रशासन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि व्यावसायिक संगठन सटीक, तेज और पर्वानुमान के लिए डिजिटल प्रणालियों पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं।’डेलॉयट के दक्षिण एशिया क्षेत्र के अध्यक्ष, (कर) गोकुल चौधरी ने कहा, “जीएसटी ने जीएसटी नेटवर्क के साथ भारत के विश्वसनीय कर ढांचे के रूप में अनुपालन और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार किया है। यह डिजिटल रीढ़ करदाताओं, व्यवसायों और सरकार को रियल-टाइम अनुपालन और डेटा-संचालित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।”

श्री चौधरी कहा कि 89 प्रतिशत हितधारक एआई-आधारित डेटा प्रोसेसिंग और रिकॉन्सिलिएशन को अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताते हैं, 84 प्रतिशत जीएसटी पोर्टल पर स्वचालित कर उपयोग का समर्थन करते हैं और 53 प्रतिशत इकाइयां एकीकृत करदाता डैशबोर्ड चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘ यह सामूहिक रूप से, ये अधिक पारदर्शिता, निश्चितता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रदान करने के लिए एम्बेडेड इंटेलिजेंस, गहन स्वचालन और निर्बाध डिजिटल अनुभवों की ओर बदलाव का संकेत देते हैं।”डेलॉयट इंडिया के पार्टनर और लीडर (अप्रत्यक्ष कर) महेश जयसिंह ने कहा, “हाल ही में जीएसटी दरों को तार्किक बनाये जाने का का काम एक महत्वपूर्ण और पथ-प्रदर्शक सुधार रहा है और इसका समग्र मूल्य निर्धारण और खपत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। बहुदरीय ढांचे को घटाकर दो दरों में समेटने से वर्गीकरण विवाद कम हुए हैं और खपत बढ़ी है, जो जीएसटी राजस्व में निरंतर वृद्धि को दर्शाता है।”

श्री जयसिंह ने कहा, ‘ उद्योग की प्रमुख अपेक्षाओं में जीएसटी परिषद द्वारा व्याख्यात्मक अस्पष्टताओं को हल करना (87 प्रतिशत), सुव्यवस्थित रिफंड और क्रेडिट उपयोग (67 प्रतिशत) के माध्यम से वर्किंग कैपिटल ( रोजमर्रा के लिए पूंजी) के प्रवाह में सुधार करना, आईटीसी विवादों को हल करना (57 प्रतिशत) और अधिक ऑडिट निरंतरता व केंद्रीकृत तथा प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों के माध्यम से अनुपालन सरलीकरण के साथ एक एकीकृत और सामंजस्यपूर्ण ऑडिट प्रक्रिया (61 प्रतिशत) को लागू करना शामिल है।

इस सर्वे में जीएसटी के कारण वर्किंग पूंजी के उलझने की चिंता को इस सर्वे में उभरी प्रमुख नीतिगत चिंता बताते हुए उन्होंने कहा कि विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रही जीएसटी प्रणाली में वर्किंग कैपिटल संबंधी चिंताओं को दूर करने का यह उपयुक्त अवसर है। इसके लिए उन्होंने अनुलोम शुल्क प्रणाली ( उत्पादन में उपयुक्त कच्चे और माध्यमिक माल पर तैयार माल की तुलना में कर की दर ऊंचा होना) के दायरे का विस्तार करके इसमें इनपुट सेवाओं और पूंजीगत सामानों को शामिल ने की सिफारिश की । उन्होंने कहा कि अनुलोम कर की समस्या विशेष रूप से फार्मा, खाद्य उत्पाद प्रोसेसिंग, ईवी और कुछ उपभोक्ता वस्तु जैसे क्षेत्रों में उपभोक्ता-अनुकूल कर कटौती के चलते उत्पन्न हुई है, जहां भारी व्यवसायियों की आईटीसी में फंसी राशि बढ़ती जा रही है।श्री जयसिंह ने कहा, ” उद्योग उम्मीद करता है कि इनमें से कुछ सिफारिशों पर अगली जीएसटी परिषद की बैठक में विचार किया जाएगा और उसके बाद नियमित जीएसटी परिषद की बैठकें होंगी, ताकि सामयिक मुद्दों का समय-समय पर समाधान किया जा सके।”

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