
नयी दिल्ली, 25 जून । बुजुर्गों के लिए आवास परियोजनाओं के विकास में लगी मनासुम सीनियर लिविंग ने वर्ष 2030 तक देशभर में वरिष्ठजनों के लिए पांच साल में 800 करोड रुपये के निवेश के साथ कुल 10 हजार मकान विकसित करेगी। बेंगलूरू की यह कंपनी वर्तमान में कंपनी कर्नाटक, गोवा और आंध्र प्रदेश में कई परियोजनाओं का परिचालन कर रही है तथा गुजरात, तमिलनाडु और तटीय कर्नाटक में भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी के प्रवर्तकों ने गुरुवार को यह संवाददाताओं से कहा कि वे अब दक्षिण भारत के साथ-साथ देश भर में विस्तार करना चाहते हैं।आईटी क्षेत्र के पेशेवर अनंतराम वी. वरयूर, सुमति अनंतराम और कुशल रमेश द्वारा स्थापित मनासुम का उद्देश्य भारत की तेजी से बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किये गये सीनियर लिविंग समुदाय विकसित करना है। इसके अंतर्गत कंपनी बुजुर्गों को भोजन, चिकित्सक और नर्सिंग सुविधाएं और रिवर्स मोर्तगेज जैसी विशिष्ट सेवाएं भी सुलभ कराती है।
उन्होंने कहा कि विस्तार रणनीति की इस रणनीति के तहत कंपनी अब दक्षिण के साथ साथ पश्चिम और उत्तर भारत में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी। वर्तमान में कंपनी के पास विभिन्न परियोजनाओं में कुल 950 यूनिट मकान हैं तथा 1,000 से अधिक यूनिट निर्माणाधीन हैं तथा 750 से अधिक मकानों के निर्माण की योजना की तैयारी है।श्री वरयूर ने कहा कि अपनी विस्तार योजनाओं को गति देने के लिए मनासुम अगले पांच वर्षों में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और देशभर में 25 से अधिक परियोजनाएं शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि कंपनी इसके लिए उद्यम पूंजी कोषों से इस साल 150-200 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने की योजना बना रही है। प्रवर्तकों का कहना है कि इस समय उसकी परियोजनाओं का अनुमानित विकास आधारित मूल्य लगभग 5,000 करोड़ है।
विस्तार रणनीति के तहत कंपनी बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोच्चि, मुंबई, पुणे, कोलकाता और गुरुग्राम जैसे प्रमुख महानगरों पर विशेष ध्यान देगी। इसके अलावा मैसूरु, मंगलुरु, हुबली-धारवाड़, कोयंबटूर, लखनऊ, चंडीगढ़, इंदौर और जयपुर जैसे टियर-2 शहरों में भी अपनी उपस्थिति बढ़ाएगी।पारंपरिक सीनियर लिविंग समुदायों के अलावा कंपनी वाराणसी, अयोध्या, वृंदावन, हरिद्वार, मदुरै, कुंभकोणम, गुरुवायूर और श्रृंगेरी जैसे आध्यात्मिक स्थलों पर अल्पकालिक (शॉर्ट-स्टे) सीनियर लिविंग मॉडल विकसित करने की संभावनाओं का भी अध्ययन कर रही है।
श्री वरयूर ने कहा, “ भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 34.6 करोड़ से अधिक होने की ओर बढ़ रही है। ऐसे में उद्देश्यपूर्ण (पर्पज़-बिल्ट) सीनियर लिविंग समुदायों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ेगी। अब चुनौती यह नहीं है कि भारत वृद्ध होगा या नहीं, बल्कि यह है कि वह सम्मानपूर्वक और बेहतर तरीके से वृद्ध होगा या नहीं। हमारा लक्ष्य केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर बनाना नहीं, बल्कि ऐसा भविष्य तैयार करना है जहां प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक हर दिन के लिए उत्साहित रहे।”सुश्री सुमति ने कहा कि हम एक समग्र सीनियर लिविंग इकोसिस्टम विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिसमें आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, देखभाल, विभिन्न सुविधाएं और सहयोगी अवसंरचना एकीकृत रूप में उपलब्ध हों।
श्री कुशल रमेश वर्तमान में एल्डर केयर सेक्टर में प्रशिक्षित पेशेवरों की भारी कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए हम एक केयरगिवर अकादमी स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, जहां प्रशिक्षित केयरगिवर्स तैयार किए जाएंगे। ये केवल मानसुम की परियोजनाओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे सीनियर केयर उद्योग की जरूरतों को भी पूरा करेंगे।