
गौतमबुद्धनगर, 27 जून । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि गौतमबुद्ध नगर अब “शापित” नहीं, बल्कि देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की कार्य संस्कृति में आए बदलाव तथा बड़े निवेशों के कारण यह क्षेत्र देश के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर गौतमबुद्धनगर में सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के नवनिर्मित मुख्य प्रशासनिक भवन सहित नोएडा और दादरी विधानसभा क्षेत्रों की 2,479 करोड़ रुपये लागत की 70 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण की कर्टेन रेजर सेरेमनी का शुभारंभ किया तथा ओडीओपी, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, एमएसएमई तकनीकी उन्नयन योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को सहायता वितरित की। उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंक अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया।योगी ने कहा कि 50 वर्ष बाद नोएडा प्राधिकरण का अपना भव्य प्रशासनिक भवन बनना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे नागरिकों, किसानों, उद्यमियों और निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी व्यवस्था विकसित होगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री गौतमबुद्ध नगर को “शापित” मानते थे और यहां आने से बचते थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस धारणा को तोड़ते हुए स्वयं नोएडा का दौरा किया, क्योंकि सरकार का दायित्व अंधविश्वास नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने बिल्डर-बायर विवाद के समाधान को प्राथमिकता देते हुए पहले चरण में लगभग सवा लाख तथा बाद में विभिन्न उपायों के माध्यम से तीन लाख से अधिक आवास खरीदारों को उनके घर दिलाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने कहा कि अब प्राधिकरण के नए भवन से नागरिक सेवाओं का संचालन और अधिक सुगम होगा तथा सभी सेवाओं को ऑनलाइन करने की दिशा में भी कार्य किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन लोगों ने प्राधिकरण से भूमि लेकर निर्धारित अवधि में निवेश नहीं किया है, उन्हें नोटिस जारी कर समयसीमा निर्धारित की जाए। इसके बाद भी निवेश न होने पर भूमि नए निवेशकों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि नया लैंड बैंक विकसित किया जा सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाएं उत्तर प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर बदल रही हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 7,000 करोड़ रुपये के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट एवं सर्किट निर्माण तथा 8,200 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सोलर सेल निर्माण इकाई की आधारशिला रखी गई है। इससे गौतमबुद्ध नगर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सौर उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र बनेगा।
उन्होंने कहा कि एक समय गौतमबुद्ध नगर को कानून-व्यवस्था की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जाता था, जबकि आज यहां फिल्म सिटी, अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क तथा अनेक बड़े औद्योगिक निवेश स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने इसका श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों को दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश के कारीगरों और हस्तशिल्पियों को पर्याप्त बाजार, तकनीक और प्रोत्साहन नहीं मिल पाता था, लेकिन सरकार ने नई डिजाइन, आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग और विपणन की व्यवस्था विकसित कर उन्हें सशक्त बनाया है।
उन्होंने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) आज देश की पहचान बन चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनके माध्यम से सवा तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र ने उत्पादन जारी रखा और बड़ी संख्या में लौटे श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा तकनीकी उन्नयन, डिजाइन विकास और कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश आज दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाला उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश के कुल मोबाइल निर्माण का लगभग 55 प्रतिशत तथा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उत्पादन का करीब 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जो प्रदेश की बढ़ती औद्योगिक क्षमता का प्रमाण है।