
अयोध्या, 27 जून । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में चढ़ावे और प्रसाद व्यवस्था को लेकर उठे विवाद के बीच शनिवार को स्पष्ट किया कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे प्राप्त हो गए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की अगली बैठक में लिया जाएगा। ट्रस्ट ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ट्रस्ट की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि मंदिर परिसर में हाल में हुई घटनाओं से ट्रस्ट अत्यंत दुखी और चिंतित है। ट्रस्ट का उद्देश्य पूरे मामले के तथ्यों को सामने लाना तथा श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे किसी भी भ्रामक अथवा अपुष्ट सूचना पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। बयान में कहा गया कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र ट्रस्ट को प्राप्त हो चुके हैं। इन पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की आगामी बैठक में लिया जाएगा। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि जिन श्रद्धालुओं ने व्यक्तिगत रूप से मंदिर अधिकारियों को चांदी की ईंटें, आभूषण अथवा अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भेंट की थीं, उनका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है और सभी वस्तुएं पूर्णतः संरक्षित हैं।उल्लेखनीय है कि राम मंदिर के दानपात्र में प्राप्त चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट मिलने के बाद ट्रस्ट ने प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व इस प्रकरण के माध्यम से सनातन आस्था को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने विश्वास व्यक्त किया कि अंततः सत्य सामने आएगा और सभी भ्रांतियां दूर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति पूर्ववत बनी रहेगी।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर के दानपात्र और प्रसाद व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद चल रहा है। विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद राज्य सरकार ने एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज होने और कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी के बीच ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफों ने इस पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।