
नयी दिल्ली, 02 जुलाई । भारत और जापान दोनों देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से भंडारण अवसंरचना, कच्चे तेल के परिवहन और तेल उत्पादक देशों के साथ समन्वय पर मिलकर काम करेंगे।जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की भारत यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रीय पहल के महत्व पर जोर दिया। दोनों नेताओं के बीच चर्चा के बाद जारी बयान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया। इसमें कहा गया है कि दोनों देश कच्चे तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों की भंडारण प्रणाली में आपस में सहयोग करेंगे। इसमें उद्योग आधारित भंडारण भी शामिल है।
भारत और जापान शुद्ध रूप से पेट्रोलियम आयातक देश हैं। इसका मतलब है कि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। दोनों देशों ने यह तय कि वे पेट्रोलियम के रणनीतिक भंडारण के लिए पारितंत्र विकसित करने में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। तेल उत्पादक देशों के साथ व्यवस्था बनाने में सहयोग और आपात प्रतिक्रिया तथा बाजार स्थिरीकरण में भी दोनों देश सहयोग पर सहमत हुए हैं।दोनों देशों ने तय किया है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऊर्जा उपभोक्ता देशों की आवाज मिलकर उठायेंगे। तीसरे देश से ऊर्जा आयात और तीसरे देश में पेट्रोलियम उत्पादन में निवेश में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी है।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की घटना के मद्देनजर दोनों देश सामुद्रिक ऊर्जा परिवहन के पूरे वैल्यू चेन में संयुक्त निवेश और संयुक्त अवसर की तलाश पर भी विचार करेंगे।पेट्रोलियम सेक्टर से जुड़े दोनों देशों के संस्थान भी आपस में सहयोग करेंगे। तय किया गया है कि जापानी की तरफ से जापान ऑर्गेनाइजेशन फॉर मेटल एंड एनर्जी सिक्योरिटी, जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन और भारत की ओर से इंडियन नेशनल ऑयल कंपनीज और इंडियन स्ट्रेटीजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड के साथ अन्य संस्थान भी आपस में सहयोग के अवसर तलाशेंगे।
भारत-जापान ऊर्जा संवाद के तहत दोनों देश पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस पर भारत-जापान संयुक्त कार्य समूह में इन अवसरों और संभावनाओं को मूर्त रूप देने पर विचार-विमर्श करेंगे।