
नयी दिल्ली 04 जुलाई। देश भर में सात करोड़ से ज़्यादा लोग नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी समस्या से प्रभावित हैं जिनमें लगभग 1.2 करोड़ बच्चे और 58 लाख महिलाएं हैं।सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने शनिवार को एक बयान में कहा कि मंत्रालय ने 2019 में देश में ‘नशीले पदार्थों के सेवन के स्तर’ का पता लगाने के लिए पहली बार देशव्यापी सर्वेक्षण कराया था। इसके नतीजों से पता चला कि सात करोड़ से ज़्यादा लोग नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी समस्या से प्रभावित थे, जिनमें लगभग 1.2 करोड़ बच्चे और 58 लाख महिलाएं शामिल थीं।”
उन्होंने कहा कि अब मंत्रालय ने ‘नशीले पदार्थों के सेवन को हतोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना ‘ शुरू की है। यह योजना रोकथाम, जागरूकता बढ़ाने, क्षमता निर्माण, उपचार, पुनर्वास और प्रभावित लोगों को फिर से समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के मकसद से बनाया गया एक व्यापक ढांचा है। इन कोशिशों को और मजबूत करने के लिए 2020 में ‘नशा मुक्त भारत अभियान ‘ शुरू किया गया था जो सरकार के ‘नशा मुक्त भारत’ बनाने के विज़न के अनुरूप है।डाॅ. कुमार ने आम जनता, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों, संबंधित मंत्रालयों और नागरिक समाज सहित सभी हितधारकों से इस समस्या से निपटने के लिए मिलकर और तालमेल के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण-समाज’ के दृष्टिकोण के माध्यम से नशा-मुक्त समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई जागरूकता, लोगों पर केंद्रित उपायों, अलग-अलग क्षेत्रों के बीच तालमेल, सहानुभूति और साझा जिम्मेदारी के आधार पर लड़ी जानी चाहिए।सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव सुधांश पंत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, मंत्रालय ने देश भर में 768 नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों के साथ इलाज और पुनर्वास सेवाओं का विस्तार किया है। इन सेवाओं में बढ़ता भरोसा इस बात का प्रमाण है कि बिना किसी भेदभाव या शर्म के उपचार कराने वाले लोगों की संख्या में 294 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह संख्या 2.08 लाख (2020 में) से बढ़कर 8.20 लाख से अधिक (2025 में) हो गयी है।
श्री पंत ने कहा कि केवल ‘जन आंदोलन’ के दृष्टिकोण से ही हम एक सशक्त, विकसित और नशा-मुक्त भारत की ओर बढ़ सकते हैं, जहां हर व्यक्ति सशक्त, स्वस्थ और सक्षम हो। उन्होंने सभी से ‘नशा मुक्त भारत’ का संकल्प लेने और क्यू आर कोड स्कैन करके ‘नशा मुक्ति मित्र’ के तौर पर रजिस्टर करने के लिए साथ आने की अपील की।पिछले महीने, देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में 17 से 26 तारीख तक मनाए गए ‘नशा मुक्त भारत सप्ताह’ में देश भर से 1.31 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों ने हिस्सा लिया। इसमें जागरूकता बढ़ाने और समुदाय को जोड़ने वाली कई गतिविधियाँ शामिल थीं, जैसे ‘नशा मुक्ति मित्र’ रजिस्ट्रेशन ड्राइव, सेमिनार और वेबिनार, बच्चों और युवाओं के लिए ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, स्किट्स, स्लोगन-लेखन प्रतियोगिताएँ, ई-प्रतिज्ञा, रैलियाँ, योग सत्र, सिग्नेचर कैंपेन, निबंध-लेखन प्रतियोगिताएँ, पेंटिंग प्रतियोगिताएँ और कम्युनिटी से जुड़ने की कई अन्य पहल।