
गोंडा, 26 अगस्त । भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के निवर्तमान अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग द्वारा डब्ल्यूएफआई के अस्थायी निलंबन के लिये ‘धरनाजीवी खिलाड़ियों’ को जिम्मेदार ठहराया है।
बृजभूषण ने शनिवार को यहां संवाददाताओं से कहा, “धरनाजीवी खिलाड़ियों की वजह से भारतीय कुश्ती संघ का चुनाव न होना ही सदस्यता रद्द होने का मुख्य कारण है। इन खिलाड़ियों ने कुश्ती को मज़ाक बना दिया है।”
उल्लेखनीय है कि बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट सहित कई नामचीन पहलवानों ने बृजभूषण पर महिला पहलवानों के यौन शोषण और जान से मारने की धमकी देने जैसे संगीन आरोप लगाये थे। खेल मंत्रालय ने इन आरोपों के मद्देनज़र बृजभूषण और उनकी अध्यक्षता वाली डब्ल्यूएफआई शासकीय समिति को निलंबित कर दिया था।
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने डब्ल्यूएफआई के संचालन के लिये 27 अप्रैल को एक तदर्थ पैनल का गठन किया था जिसे 45 दिन के अंदर महासंघ के चुनाव करवाने थे।यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने एक बयान में चेतावनी दी थी कि अगर निर्धारित समय में डब्ल्यूएफआई के चुनाव नहीं हुए तो उसे निलंबित कर दिया जायेगा।
बृजभूषण ने डब्ल्यूएफआई के चुनावों पर कहा, “सरकार के आदेश पर मैंने अपने आप को कुश्ती से अलग कर लिया। मेरे संग मेरा बेटा करण भूषण सिंह भी संघ से अलग हो गया। एशियाई खेल होने वाले हैं लेकिन कुश्ती का कोई शिविर आयोजित नहीं हुआ है। यह दुखद है की भारत पर पहली बार प्रतिबंध लगा।”
उन्होंने कहा, “धरनाजीवी खिलाड़ियों की मांग है कि मैं भारत की नागरिकता छोड़ दूं तो यह संभव नहीं। यह सब प्रदर्शनकारियों और तीन पहलवानों की वजह से हुआ। इसके लिये साक्षी, बजरंग और विनेश जिम्मेदार हैं।”
डब्ल्यूएफआई के निलंबन के कारण भारतीय पहलवान आगामी एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में राष्ट्रीय ध्वज के तले नहीं खेल सकेंगे। उन्हें इन आयोजनों में तटस्थ एथलीटों के रूप में हिस्सा लेना होगा।