
नयी दिल्ली, 07 जुलाई । केंद्र सरकार ने पंजाब के आतंकवाद के कारण उपजी समस्याओं पर बनी फिल्म ‘सतलुज’ को एक अंतर-विभागीय समिति के पास भेजकर इसकी औपचारिक समीक्षा शुरू कर दी है। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत गठित यह समिति फिल्म की सामग्री का आकलन करेगी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को उचित कार्रवाई की सिफारिश करेगी।
यह फिल्म तीन जुलाई को अपने डिजिटल प्रसारण के तुरंत बाद जांच के दायरे में आ गई थी। ज़ी5 ने पांच जुलाई को इसे अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था। फिल्म को हटाए जाने के बाद ज़ी5 ने कहा था कि सतलुज अगले आदेश तक भारत में नहीं देखी जा सकेगी।
जी5 ने फिल्म और उसके निर्माताओं के प्रति अपना समर्थन जताते हुए कहा कि उसका इरादा अपनी सेवा पर इस फिल्म को वापस लाने के लिए निर्धारित कानूनी और नियामक प्रक्रिया का पालन करने का है। फिल्म ‘सतलुज’ को ‘पंजाब 95’ के नाम से बनाया गया था पर बाद में उसका नाम बदल दिया गया। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह कालड़ा की भूमिका निभाई है।हनी त्रेहान की निर्देशित यह फिल्म 1995 में पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान अवैध हत्याओं और गुप्त तरीके से किए लाशों के दाह संस्कारों के आरोपों की जांच करने के श्री कालड़ा के प्रयासों को दर्शाती है। श्री कालड़ा बाद में खुद पुलिसिया जुल्म के शिकार हुए। इस मामले में कुछ पुलिस कर्मियों को उम्रकैद की सजा दी गयी।सूत्रों ने बताया कि इस परियोजना को मूल रूप से सिनेमाघरों में रिलीज के लिए 2022 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान, बोर्ड द्वारा इसमें व्यापक बदलावों के सुझाव दिए जाने की बात सामने आई थी। तब सिनेमाघरों में इसकी रिलीज संभव नहीं हो सकी और अंततः इस फिल्म को एक नए शीर्षक के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया।अधिकारियों का कहना है कि हालांकि ओटीटी सामग्री के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से पहले से मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं है, लेकिन डिजिटल स्ट्रीमिंग सेवाओं के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत निर्धारित दायित्वों का पालन करना आवश्यक है। डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ओटीटी प्लेटफार्मों से संबंधित शिकायतों की जांच करने वाली इस अंतर-विभागीय समिति में सरकार द्वारा नामित विशेषज्ञों के अलावा सूचना एवं प्रसारण, गृह, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा, विदेश, कानून एवं न्याय, और महिला एवं बाल विकास जैसे प्रमुख मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।अपनी जांच पूरी करने के बाद, यह समिति सलाह, अस्वीकरण जारी करने, सामग्री में बदलाव करने, या कानूनी रूप से आवश्यक होने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत सामग्री के प्रसारण को रोकने सहित कई तरह के उपायों की सिफारिश कर सकती है