राम मंदिर में नये ट्रस्ट का गठन जरुरी,प्रमुख धर्माचार्य हों शामिल: अविमुक्तेश्वरानंद

राम मंदिर में नये ट्रस्ट का गठन जरुरी,प्रमुख धर्माचार्य हों शामिल: अविमुक्तेश्वरानंद

रायबरेली, 11 जुलाई । जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने शनिवार को अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर उसके पुनर्गठन की मांग करते हुए कहा कि नीति निर्धारण के लिए देश के प्रमुख धर्माचार्यों को शामिल करते हुए नया ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए। अपने दो दिवसीय रायबरेली दौरे के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यदि राम मंदिर ट्रस्ट में अनियमितताओं के आरोप सही हैं तो यह लाखों राम भक्तों की आस्था और विश्वास को गहरी ठेस पहुंचाने वाला विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होगा।उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर देश के मूर्धन्य धर्माचार्यों को शामिल करते हुए नीति निर्धारण और दिशा-निर्देशन के लिए नया ट्रस्ट गठित किया जाए। साथ ही अयोध्या के प्रमुख धर्माचार्यों की एक अलग समिति बनाई जाए, जो मंदिर में प्रतिदिन होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन करे।

शंकराचार्य ने कहा कि अयोध्या में सरकार की ओर से प्रशासनिक और विजिलेंस व्यवस्था रहने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन धार्मिक कार्यों में सरकारी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निगरानी और धार्मिक परंपराओं के संचालन के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शंकराचार्य के दर्शन और आशीर्वाद के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। अनेक स्थानों पर उनका स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं ने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। शंकराचार्य का शनिवार रात्रि विश्राम बछरावां में प्रस्तावित है। इसके बाद वह रविवार को अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अन्य स्थानों का भ्रमण करेंगे।

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