
कानपुर, 12 जुलाई । आयोजन स्थल को लेकर तमाम अटकलों को विराम देते हुये उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) ने रविवार को यूपी टी-20 लीग के चौथे संस्करण को दो शहरों में कराने की घोषणा की। इस बार पहली बार प्रतियोगिता का आयोजन दो शहरों लखनऊ और कानपुर में किया जाएगा।
यूपीसीए की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में तय किया गया कि यूपी टी-20 सीजन-4 का आयोजन 14 अगस्त से छह सितंबर 2026 तक होगा। लगभग 24 दिनों तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में कुल 34 मुकाबले खेले जाएंगे, जिनमें 13 डबल हेडर और आठ सिंगल हेडर मैच दिवस शामिल होंगे।
प्रतियोगिता का पहला चरण भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम, लखनऊ में आयोजित होगा, जहां 13 मैच दिवसों में 22 मुकाबले खेले जाएंगे। दूसरा चरण ग्रीन पार्क स्टेडियम, कानपुर में होगा, जहां 11 मैच दिवसों में 12 मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। उद्घाटन समारोह और पहला मुकाबला लखनऊ में जबकि फाइनल और समापन समारोह कानपुर में आयोजित किया जाएगा।गवर्निंग काउंसिल ने बताया कि यूपी टी-20 सीजन-4 की मिनी नीलामी 24 जुलाई को आगरा में होगी, जिसमें छह फ्रेंचाइजी के लिए 45 खिलाड़ियों के स्लॉट उपलब्ध रहेंगे। परिषद ने रिटेंशन नियम, खिलाड़ी चयन प्रक्रिया, कैचमेंट एरिया ट्रायल, सपोर्ट स्टाफ चयन दिशा-निर्देश और मिनी नीलामी नियमों को भी मंजूरी दी, ताकि प्रतियोगिता का संचालन पारदर्शी, निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से किया जा सके।
स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कैचमेंट एरिया मॉडल को पूर्ववत जारी रखा जाएगा, जिससे प्रदेश के विभिन्न जिलों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना एक बार फिर लीग के ब्रांड एंबेसडर होंगे और लीग का आधिकारिक एंथम ‘खिलाड़ी यहाँ बनता है’ भी जारी रहेगा।खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष भी कुल तीन करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। विजेता टीम को एक करोड़ रुपये, उपविजेता को 60 लाख रुपये तथा अन्य शीर्ष टीमों को भी आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे।
यूपीसीए ने इस संस्करण में ‘हर बाउंड्री, एक नई हरियाली’ अभियान शुरू करने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत पूरे टूर्नामेंट में लगाए गए प्रत्येक चौके और छक्के के बराबर संख्या में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वृक्षारोपण किया जाएगा। परिषद के अनुसार इस पहल का उद्देश्य क्रिकेट के रोमांच को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना और युवाओं में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।