
वाशिंगटन/तेहरान, 22 जुलाई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का अगला निशाना ‘पिकैक्स माउंटेन’ हो सकता है जो ईरान का एक बेहद सुरक्षित और मजबूत भूमिगत परमाणु परिसर है।
पश्चिमी और इजरायली खुफिया एजेंसियों को संदेह है कि ईरान ने पिछले हवाई हमलों से बचाने के लिए अपने बचे हुए यूरेनियम के भंडार को पिकैक्स माउंटेन में सुरक्षित रखा है। श्री ट्रंप की इस चेतावनी के जवाब में ईरान ने कहा है कि उसके परमाणु ठिकानों पर किसी भी अमेरिकी हमले को क्षेत्रीय संघर्ष के विस्तार के रूप में देखा जाएगा।
पहले नतांज, फोर्डो और इस्फहान में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद खुफिया आकलन से यह बात सामने आई है कि ईरान ने अपनी मुख्य परमाणु संपत्तियों को इस पहाड़ी के नीचे स्थानांतरित कर दिया है। जमीन से 100 मीटर से भी अधिक गहराई में चट्टानों के नीचे बना यह ठिकाना ईरान के सबसे सुरक्षित परमाणु स्थलों में से एक माना जाता है।
राष्ट्रपति कार्यालय में श्री ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि हम बहुत जल्द उस इलाके पर बहुत भारी हमला कर सकते हैं और वे इसे रोकने के लिए कुछ नहीं कर सकते। इजरायली खुफिया जानकारी के मुताबिक पिछले साल हुए हमलों के बाद ईरान ने अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का हिस्सा और उन्नत सेंट्रीफ्यूज इस भूमिगत परिसर में स्थानांतरित कर दिए हैं। हालांकि श्री ट्रंप ने इस आकलन की सीधी पुष्टि नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिका का अनुमान है कि बार-बार के सैन्य अभियानों के बावजूद ईरान के पास अब भी लगभग 1,000 पाउंड अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है जो हथियार बनाने के स्तर के करीब है।
ईरान में इस पहाड़ी को ‘कूह-ए कलंग गज ला’ के नाम से जाना जाता है, जो नतांज यूरेनियम संवर्धन परिसर से लगभग एक मील दक्षिण में स्थित है। यहां स्थित परिसर का निर्माण 2020 में शुरू हुआ था। इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (आईएसआईएस) द्वारा विश्लेषण की गई उपग्रह तस्वीरों से पता चलता है कि इस परिसर में कई सुरंग नेटवर्क, बेहद मजबूत प्रवेश द्वार और एक बड़ा सुरक्षा घेरा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिकैक्स माउंटेन अमेरिका के लिए एक बड़ी सैन्य चुनौती पेश करता है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी अत्यधिक गहराई के कारण अमेरिका का सबसे शक्तिशाली बंकर-बस्टिंग बम ‘मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर’ (एमओपी) भी सीमित असर ही दिखा सकता है। हवाई हमलों से सुरंगों के रास्ते बंद किए जा सकते हैं और बिजली आपूर्ति रोकी जा सकती है, लेकिन भूमिगत कमरों को पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों पर प्रतिबंध होने के कारण ईरान के परमाणु भंडार को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है, जिससे पिकैक्स माउंटेन दोनों देशों के बीच तनाव का नया मुख्य केंद्र बन गया है।