श्रावण मास में प्रयागराज में ट्रैफिक डायवर्जन लागू, 29 अगस्त तक कांवड़ियों के लिए विशेष यातायात व्यवस्था

श्रावण मास में प्रयागराज में ट्रैफिक डायवर्जन लागू, 29 अगस्त तक कांवड़ियों के लिए विशेष यातायात व्यवस्था

प्रयागराज, 1 अगस्त । भगवान शिव की आराधना के पवित्र श्रावण मास के आरंभ के साथ ही प्रयागराज के मंदिरों और शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। कांवड़ यात्रा को देखते हुए जिला प्रशासन ने शनिवार रात से विशेष ट्रैफिक व्यवस्था और रूट डायवर्जन लागू कर दिया है, जो 29 अगस्त तक प्रभावी रहेगा।प्रशासन के अनुसार, प्रयागराज-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक लेन पूरी तरह कांवड़ यात्रियों के लिए आरक्षित कर दी गई है, जबकि दूसरी लेन से सामान्य एवं नियंत्रित यातायात संचालित किया जाएगा। कांवड़ यात्रा के मद्देनजर शास्त्री पुल (झूसी पुल) पर रोडवेज बसों तथा भारी व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे वाहनों को वैकल्पिक बाईपास मार्गों से उनके गंतव्य की ओर भेजा जाएगा।

वाराणसी और जौनपुर की ओर से आने वाली रोडवेज बसों को अब हंडिया–सहसों–फाफामऊ मार्ग से प्रयागराज में प्रवेश कराया जाएगा। आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य सभी भारी एवं व्यावसायिक वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं।प्रयागराज-वाराणसी हाईवे पर झूसी से हनुमानगंज, हंडिया और बरौत तक बैरिकेडिंग की गई है। कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए एक लेन पूरी तरह पैदल कांवड़ियों के लिए सुरक्षित रखी गई है, जबकि दूसरी लेन से सीमित एवं नियंत्रित यातायात संचालित होगा।

यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख चौराहों और तिराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरे कांवड़ मार्ग की निगरानी की जाएगी। श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम से गंगाजल लेकर मनकामेश्वर सहित शहर के विभिन्न शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं।मंदिर परिसरों और कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग, भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा सहायता, सफाई व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और दर्शन-पूजन शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित वातावरण में संपन्न हो सके।

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