
वाराणसी, 1 अगस्त । धार्मिक नगरी काशी के पातालपुरी मठ में भगवान श्रीराम के इतिहास और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद एवं विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय ‘श्रीराम परिवार गाथा’ के दूसरे दिन शुक्रवार को धर्माचार्यों एवं इतिहासविदों ने राम के इतिहास को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर महंत प्रभु रामदास जी ने कहा कि श्रीराम के जीवन, आदर्शों और नीतियों को कक्षा पांच से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीराम की नीतियों पर शोध करने वाले विद्वानों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
कार्यक्रम में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मृदुला जायसवाल ने विषय प्रस्तावना रखते हुए कहा कि भारत के इतिहास और संस्कृति को हीन सिद्ध करने के प्रयास में कुछ इतिहासकारों द्वारा राम के इतिहास को काल्पनिक बताना एक बड़ी भूल रही है। उन्होंने कहा कि इससे सांस्कृतिक मूल्यों का ह्रास हुआ और परिवार व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।डॉ. जायसवाल ने कहा कि यदि वाल्मीकि रामायण जैसे मूल स्रोतों के माध्यम से समाज को यह बताया जाता कि भगवान श्रीराम ने माता-पिता की आज्ञा के पालन हेतु राजसिंहासन का त्याग कर वनवास स्वीकार किया, तो यह आदर्श पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में सहायक होता। उन्होंने कहा कि इतिहास के सत्य को सामने लाने के लिए मठों और विश्वविद्यालयों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं तथा मंदिरों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक इतिहास के प्रसार के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।