
लखनऊ, 02 अगस्त । उत्तर प्रदेश में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद और उसके राजनीतिक असर के बीच अब प्रश्नपत्र लीक, सरकारी भर्तियों में देरी तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नई राजनीतिक चुनौती के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले छात्र-युवा आंदोलन के समाप्त हो जाने के बावजूद उसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चाएं जारी हैं। आंदोलन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया था और राज्य के कई हिस्सों में इसके समर्थन में प्रदर्शन भी हुए।
आंदोलन के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में विलंब, रिक्त पदों को शीघ्र भरने तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
इन मुद्दों पर विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने आंदोलन का समर्थन किया, जबकि भाजपा ने छात्र प्रतिनिधियों से संवाद कर सरकार द्वारा प्रश्नपत्र लीक रोकने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया।
निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 13.39 करोड़ है। इनमें 18-19 वर्ष आयु वर्ग के 17.63 लाख से अधिक प्रथम मतदाता शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं की यह बड़ी आबादी आगामी विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
उनका कहना है कि आंदोलन ने जाति और धार्मिक विमर्श से इतर रोजगार, शिक्षा और सुशासन जैसे मुद्दों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष इन विषयों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में जुटा है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संकेत दिए हैं कि पार्टी की ‘पीडीए’ रणनीति के साथ-साथ युवाओं से जुड़े मुद्दे भी 2027 के चुनाव अभियान का प्रमुख हिस्सा होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के कारण युवाओं में सरकार के प्रति नाराजगी है और इसका असर चुनाव में दिखाई देगा।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि है कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में नौ लाख से अधिक युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा में सफल विद्यार्थियों से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए कठोर कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए हैं तथा हाल के दिनों में कई आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ सुरक्षित एवं पारदर्शी परीक्षाएं कराई गई हैं।
भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) को भी सक्रिय करने की तैयारी में है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने गैर-भाजपा शासित राज्यों में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन शुरू किए हैं।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दल भी इस मुद्दे के राजनीतिक प्रभाव को स्वीकार कर रहे हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि विपक्ष युवाओं के मुद्दे को चुनावी हथियार बनाने की कोशिश करेगा, लेकिन राजग सरकार द्वारा रोजगार और भर्ती प्रक्रिया में किए गए सुधारों को जनता के सामने रखेगा।
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने कहा कि युवा और किसान उनकी पार्टी की प्राथमिकता हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन युवाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए समन्वय के साथ काम कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई पीढ़ी के मतदाता अब पारंपरिक जातीय और धार्मिक पहचान के बजाय रोजगार, शिक्षा और अवसरों जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
वहीं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर चंद्रकांत त्रिपाठी ने कहा कि यदि भाजपा 2027 में सत्ता बरकरार रखना चाहती है तो उसे रोजगार, शिक्षा और सुशासन से जुड़े सवालों का प्रभावी उत्तर देना होगा।