काशी से अखिल भारतीय संत समिति ने देशभर में ‘सनातन शंखनाद’ अभियान शुरू करने की घोषणा की

काशी से अखिल भारतीय संत समिति ने देशभर में ‘सनातन शंखनाद’ अभियान शुरू करने की घोषणा की

वाराणसी, 02 अगस्त। अखिल भारतीय संत समिति ने सनातन धर्म और साधु-संत समाज के खिलाफ कथित रूप से हो रहे षड्यंत्रों का विरोध करते हुए देशभर में ‘सनातन शंखनाद’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। समिति ने कहा कि सनातन विरोधी गतिविधियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रविवार को ब्रह्म निवास छोटी गैबी में आयोजित अखिल भारतीय संत समिति के बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि इसे भगवान आदि शंकराचार्य के शंकर दिग्विजय के दूसरे चरण के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि संत समाज ने दशकों की चुप्पी तोड़ दी है और वह सनातन धर्म के विरोधियों का लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से मुकाबला करेगा।

इस अवसर पर जगद्गुरु बालक दास ने संसद परिसर में सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के कथित कृत्य को भगवान राम और सनातन धर्म का अपमान बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस घटना से करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस पप्पू यादव को शीघ्र गिरफ्तार नहीं करती है तो संत समाज इस मामले में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, राहुल गांधी तथा अवधेश प्रसाद के खिलाफ थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई है।

स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए साधु-संतों और भगवा वस्त्रों का अपमान करने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में संत समाज का सम्मान सर्वोपरि रहा है और उसका अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रव्यापी ‘सनातन शंखनाद’ अभियान को श्री काशी विद्वत् परिषद और विश्व हिंदू परिषद का भी समर्थन प्राप्त है। श्री काशी विद्वत् परिषद के महामंत्री प्रो. राम नारायण द्विवेदी तथा विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री अशोक तिवारी ने अभियान के प्रति समर्थन व्यक्त किया।बैठक में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा दक्षिण भारत सहित विभिन्न राज्यों से आए संतों ने भाग लिया।इससे पूर्व संत समिति की बैठक में दो से पांच नवंबर तक संस्कृति संसद आयोजित करने का निर्णय लिया गया। स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि दो नवंबर को राम मंदिर आंदोलन में वीरगति प्राप्त कारसेवकों की स्मृति में रुद्राभिषेक के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। उन्होंने कहा कि संस्कृति संसद में देशभर की विभिन्न परंपराओं के तीन हजार से अधिक संतों के भाग लेने की संभावना है।

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