
लखनऊ, 4 अगस्त । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में रामलला मंदिर के चढ़ावा प्रकरण को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का आचरण अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है तथा यह बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की भावना का भी अपमान है।मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष जिस मामले को “चंदा चोरी” बता रहा है, वह वास्तव में रामलला मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा एक प्रकरण है। उन्होंने बताया कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 12 जून को उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर मीडिया में आई खबरों के आधार पर एसआईटी जांच कराने का अनुरोध किया था।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित धर्मार्थ ट्रस्ट है और राज्य सरकार ट्रस्ट के अनुरोध या न्यायालय के निर्देश के बिना इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले सकती थी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन कर दिया। एसआईटी ने 23 जून को अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर सरकार ने ट्रस्ट को सिफारिशें भेजीं और अयोध्या में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।उन्होंने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें छह लोगों की भूमिका चढ़ावे की धनराशि के दुरुपयोग में सामने आई, जबकि दो अन्य लोगों को भी मामले में शामिल किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी की जांच में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता नहीं पाई गई है। उन्होंने बताया कि श्रीरामजन्मभूमि परिसर में 1100 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं और उनमें से केवल आठ लोगों की भूमिका इस प्रकरण में सामने आई है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ कर्मचारियों की कथित संलिप्तता के आधार पर साधु-संतों, अयोध्या धाम, श्रीरामजन्मभूमि मंदिर और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को कठघरे में खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है।मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने हमेशा भगवान श्रीराम और रामजन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया है तथा अतीत में रामभक्तों पर गोली चलाने जैसी घटनाओं को भी प्रदेश की जनता नहीं भूली है।