पिछले पांच दिनों की व्यापक बारिश से मानसूनी वर्षा सामान्य श्रेणी में पहुंची, नदियों का जलस्तर बढ़ा

पिछले पांच दिनों की व्यापक बारिश से मानसूनी वर्षा सामान्य श्रेणी में पहुंची, नदियों का जलस्तर बढ़ा

लखनऊ, 08 अगस्त। उत्तर प्रदेश में पिछले चार-पांच दिनों से हो रही व्यापक वर्षा के चलते चालू मानसून सीजन में प्रदेश की कुल वर्षा सामान्य श्रेणी में पहुंच गई है।वर्षा के प्रादेशिक विचलन में 10 प्रतिशत का सुधार हुआ है और यह -29 प्रतिशत से घटकर -19 प्रतिशत रह गया है। सामान्य वर्षा की श्रेणी -19 से 19 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। इस बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी वर्षा का दौर जारी है और अगले चार दिनों तक विशेषकर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है।

मौसम संबंधी परिस्थितियों के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर मध्य क्षोभमंडल तक विस्तृत चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से निम्न दबाव क्षेत्र बना है। इसके चलते मानसूनी द्रोणी अपनी सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है। वहीं दक्षिणी गांगेय पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में ऊपरी क्षोभमंडल तक विस्तृत चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से अगले 24 घंटों में तटीय गांगेय पश्चिम बंगाल तथा उससे लगे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में एक और निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके मानसूनी द्रोणी के साथ पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने से प्रदेश में मानसूनी प्रवाह और मजबूत होने का अनुमान है।बारिश के चलते प्रदेश की कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय जल आयोग के शनिवार सुबह जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार घाघरा नदी तुर्तीपार में सुबह आठ बजे 63.86 मीटर पर थी और जलस्तर बढ़ रहा था। यहां चेतावनी स्तर 63.01 मीटर और खतरे का स्तर 64.01 मीटर है। आयोग ने नौ अगस्त सुबह तक जलस्तर 63.96 मीटर पहुंचने का पूर्वानुमान जताया है। घाघरा अयोध्या में जलस्तर 92.62 मीटर दर्ज किया गया, जो 92.73 मीटर के खतरे के स्तर के बेहद करीब है, हालांकि वहां जलस्तर में गिरावट का रुख दर्ज किया गया। एल्गिनब्रिज में घाघरा 106.17 मीटर पर स्थिर रही, जबकि चेतावनी स्तर 105.07 और खतरे का स्तर 106.07 मीटर है।

राप्ती नदी का बंसी में जलस्तर 81.78 मीटर दर्ज किया गया, जहां जलस्तर गिर रहा था। बर्डघाट में राप्ती 72.38 मीटर पर स्थिर रही, जबकि बहराइच के भिंगा में राप्ती का जलस्तर 117.90 मीटर और माधवापुर में 124.12 मीटर दर्ज किया गया। छोटी गंडक नदी सलेमपुर में 63.26 मीटर पर थी और जलस्तर बढ़ रहा था। घाघरा गोलाबाजार में 72.48 मीटर के साथ बढ़त पर रही। रोहिन नदी मणिराम में 73.86 मीटर और त्रिमोहिनीघाट में 81.04 मीटर पर दर्ज की गई।विभिन्न नदी क्षेत्रों में बारिश भी दर्ज की गई है। आठ अगस्त सुबह तक बुढ़ी राप्ती के ककराही में सर्वाधिक 37.8 मिमी, गौरी गंगा के बांगापानी में 35.4 मिमी, क्वानो के मुखलिसपुर में 22.4 मिमी, छोटी गंडक के सलेमपुर में 17.8 मिमी, राप्ती के रेगौली में 5.2 मिमी और रोहिन के त्रिमोहिनीघाट में 4.4 मिमी वर्षा दर्ज हुई।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सरयू-बाबई के गायघाट में जलस्तर 127.85 मीटर और सरयू के कर्नलगंज में 101.86 मीटर रहा। घाघरा सोनई मोहम्मदपुर में 96.16 मीटर, बहराइच के बीके घाट में 135.40 मीटर, शारदानगर में शारदा नदी 135.17 मीटर तथा कुकिया में महाकाली-शारदा 139.91 मीटर पर दर्ज की गई। शारदानगर में शारदा का जलस्तर बढ़ रहा था, जबकि बीके घाट और अन्य कुछ स्थानों पर गिरावट या स्थिरता का रुख रहा।इस बीच घाघरा के कटरनियाघाट बैराज पर जलस्तर 136.8 मीटर दर्ज किया गया और आयोग के पूर्वानुमान में नौ अगस्त सुबह तक करीब 4000 घन मीटर प्रति सेकंड का प्रवाह तथा जलस्तर में गिरावट का रुख बताया गया है। शारदा नदी के बनबसा बैराज पर जलस्तर 222.6 मीटर दर्ज किया गया और फिलहाल वह स्थिर था।

लगातार वर्षा और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि उपलब्ध केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों में अधिकांश निगरानी केंद्रों पर जलस्तर खतरे के स्तर से नीचे या स्थिर/गिरते रुख में दर्ज किया गया है, जबकि कुछ स्थानों पर जलस्तर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले चार दिनों में विशेषकर दक्षिणी उत्तर प्रदेश में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक निगरानी बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

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