
मुंबई, 09 अगस्त। फिल्मकार और अभिनेता फरहान अख्तर ने अपनी चर्चित फिल्म ‘दिल चाहता है’ की कास्टिंग से जुड़ी कहानी साझा करते हुए कहा है कि उस समय कलाकारों को तीन दोस्तों की कहानी पर भरोसा दिलाना आसान नहीं था। फिल्म के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर फरहान ने बताया कि उस दौर में हिंदी सिनेमा में प्रेम त्रिकोण वाली फिल्मों का चलन था, जबकि वह दोस्ती पर केंद्रित कहानी बनाना चाहते थे।द जगरनॉट से बातचीत में फरहान ने आमिर खान को फिल्म में लेने की मुश्किल का जिक्र करते हुए कहा, “आमिर खान को कास्ट करना आसान नहीं था। हर कोई कहता था, ‘मैं मल्टी-हीरो फिल्म नहीं करना चाहता।’ उस समय हर कोई लव ट्रायंगल करना चाहता था।”
फरहान ने कहा कि वह शुरू से ही फिल्म में दो दोस्तों के बीच एक लड़की को लेकर टकराव का पुराना फॉर्मूला नहीं अपनाना चाहते थे। उनके लिए कहानी का केंद्र दोस्ती थी। उन्होंने कहा, “मेरे लिए फिल्म का मूल दोस्ती था और मैं दो लड़कों को एक लड़की के लिए लड़ते हुए नहीं दिखाना चाहता था।”उन्होंने बताया कि आमिर को फिल्म के लिए राजी करने में करीब आठ महीने लगे। फरहान के पिता जावेद अख्तर ने आमिर के साथ ‘लगान’ में काम किया था, लेकिन उन्होंने अपने पिता के संबंधों के जरिए किसी विशेष परिचय का सहारा लेने के बजाय खुद लगातार प्रयास किया। उन्होंने कहा, “मैंने किसी खास परिचय के लिए नहीं कहा। मैं लगातार कोशिश करता रहा और आठ महीने तक इंतजार किया, तब जाकर आमिर पूरी पटकथा सुनने के लिए तैयार हुए।”
फरहान के अनुसार , पटकथा सुनने के बाद आमिर ने उनसे कहा था कि उन्हें खुशी है कि फरहान ने उन्हें फिल्म में लेने के लिए इतनी कोशिश की, क्योंकि इससे उन्हें महसूस हुआ कि फरहान इस भूमिका के लिए उन्हें कितना चाहते थे।वर्ष 2001 में प्रदर्शित ‘दिल चाहता है’ ने हिंदी सिनेमा में दोस्ती को पर्दे पर पेश करने के अंदाज को नई दिशा दी। आमिर खान, अक्षय खन्ना और सैफ अली खान अभिनीत इस फिल्म ने एक पूरी पीढ़ी को ऐसी कहानी दी, जिसमें दोस्ती, रिश्तों और जिंदगी के बदलते पड़ावों की झलक दिखाई दी। फिल्म की 25वीं वर्षगांठ पर फरहान की यह कहानी बताती है कि दोस्ती पर आधारित इस फिल्म को बनाने से पहले उन्हें उस दौर की प्रचलित फिल्मी सोच को चुनौती देनी पड़ी थी।