
कानपुर, 11 अगस्त। उत्तर प्रदेश में डिफेंस सेक्टर के तेजी से विस्तार के साथ कानपुर देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत कानपुर में रक्षा गोला-बारूद, छोटे हथियारों और आर्टिलरी सिस्टम से जुड़े उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्माण हो रहा है। निवेश, आधुनिक तकनीक, उत्पादन क्षमता और रोजगार के बढ़ते अवसरों के बीच कानपुर रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को नई धार दे रहा है।
इसी क्रम में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की कानपुर स्थित एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में विशेष दौरे का आयोजन किया गया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आशीष राजवंशी ने इस दौरान विस्तार योजनाओं और रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि कानपुर के हाथीपुर क्षेत्र में करीब 250 एकड़ में इकाई के विस्तार की योजना है। प्रस्तावित सुविधा में करीब 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कंपनी कानपुर में पहले ही करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है और आने वाले वर्षों में लगभग 4,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश करने की योजना है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
कंपनी की कानपुर स्थित इकाई में फिलहाल करीब 2,000 कुशल और अकुशल कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां वर्तमान में सालाना करीब 15 करोड़ राउंड विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद का उत्पादन किया जा रहा है, जिसे वर्ष के अंत तक बढ़ाकर करीब 30 करोड़ राउंड करने का लक्ष्य है।फैसिलिटी में छोटे हथियारों में इस्तेमाल होने वाले स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन के साथ टैंक और आर्टिलरी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले लार्ज-कैलिबर एम्युनिशन का निर्माण और असेंबलिंग की जा रही है। मीडियम-कैलिबर एम्युनिशन का उत्पादन भी शुरू करने की तैयारी है, जिसके 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है।
कंपनी ने 2027 तक सालाना 40 लाख ग्रेनेड उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य भी रखा है। इसके बाद 2029 तक अतिरिक्त 40 लाख यूनिट की क्षमता विकसित करने की योजना है। इससे घरेलू स्तर पर गोला-बारूद की उपलब्धता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।श्री राजवंशी ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं को घरेलू स्तर पर विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि गोला-बारूद समेत रक्षा उपकरणों के लिए आत्मनिर्भरता रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और देश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कानपुर इकाई में प्रदर्शित हथियारों में अभय राइफल और प्रहार लाइट मशीन गन भी शामिल थीं। अधिकारियों के मुताबिक अभय राइफल 5.56 एमएम और 9 एमएम, दोनों प्रकार के गोला-बारूद के इस्तेमाल में सक्षम है। वहीं प्रहार लाइट मशीन गन को भारतीय सेना की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और इसके लिए बड़ा ऑर्डर मिलने की जानकारी दी गई।रक्षा विनिर्माण प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार एआई आधारित केस-लाइन इंस्पेक्शन तकनीक के जरिए एम्युनिशन केस की निर्धारित मानकों के अनुरूप जांच की जाती है। इससे निरीक्षण प्रक्रिया को अधिक स्वचालित और सटीक बनाने में मदद मिलती है तथा उत्पादन की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि यहां निर्मित गोला-बारूद और संबंधित रक्षा प्रणालियां नाटो मानकों के अनुरूप तैयार की जा रही हैं। इससे हथियार प्रणालियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और प्रदर्शन में एकरूपता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। कंपनी के अनुसार उसके एम्युनिशन की मांग मित्र देशों से भी बढ़ रही है।कानपुर में प्रस्तावित विस्तार और बढ़ते निवेश से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में कानपुर की औद्योगिक एवं रणनीतिक भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है। इससे प्रदेश में रक्षा विनिर्माण के साथ-साथ रोजगार, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को भी गति मिलने की संभावना है।