
नई दिल्ली, 13 अगस्त । फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइज़ेशन्स (फियो) के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने जुलाई में वस्तु निर्यात में 19 प्रतिशत से ज़्यादा की वृद्धि को एक शानदार उपलब्धि बताया है और कहा कि यह भारतीय निर्यातकों की हिम्मत, प्रतिस्पर्धा क्षमता और हालात के हिसाब से ढलने की उनकी क्षमता का मज़बूत सबूत है।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी जलाई के निर्यात- आयात के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री रल्हन ने कहा कि यह तेज़ वृद्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब हम लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में रुकावटों, ज़्यादा भाड़ा और प्रमुख विश्व बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हैं।
फियो अध्यक्ष ने कहा कि निर्यात क्षेत्र की वर्तमान गति को बनाए रखने के लिए लगातार नीति समर्थन की ज़रूरत होगी, खासकर इसलिए क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव, शिपिंग में रुकावट, माल भाड़े की दरों में उतार-चढ़ाव और बदलती व्यापार नीतियां वैश्विक वाणिज्य के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं।उन्होंने कहा, “भारतीय निर्यातकों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे मुश्किल हालात में भी काम कर सकते हैं। अब ज़रूरत है कि एक ऐसी व्यापार नीति बनाई जाए जो हालात के हिसाब से काम करे, साथ ही निर्यात के लिए सही और कर्ज स्पर्धी दरों पर मिले, कारोबार के लिए पूंजी आसानी से मिल सके, व्यापार प्रक्रियाएं तेज़ हों और शिपिंग तथा लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों पर तुरंत ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा, ” एमएसएमई और ज़्यादा श्रम गहन वाले क्षेत्र को खास मदद और तेज़ी से बाजार में विविधता लाने से भारत की निर्यात के मामले में प्रतिस्पर्धा क्षमता और मज़बूत होगी।”
जुलाई में वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 19 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़कर रिकॉर्ड 44.24 अरब डॉलर तक पहुँच गया। फियो ने बढ़ते आयात बिल और बढ़ते व्यापार घाटे पर ध्यान देने की ज़रूरत बतायी है। जुलाई में वाणिज्यक आयात 76.22 अरब डॉलर तक पहुंच गया जिससे व्यापार घाटा बढ़ कर 31.98 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल-जुलाई के दौरान, वस्तु निर्यात में 17.04 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में वस्तु आयात में 19.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई।श्री रल्हन ने कहा, “हालांकि ऊर्जा, पूंजीगत सामान और माध्यमिक वस्तुओं के आयात भी घरेलू आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी से जुड़ा है, लेकिन हमें विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण सामग्रियों , इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी आदि के लिए आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू विनिर्माण को मज़बूत करने की ज़रूरत है।”
उन्होंने कहा, ” भारत के बाहरी क्षेत्र को मज़बूत करने में निर्यात का विस्तार और रणनीतिक आयात प्रतिस्थापन एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए।”