
वाराणसी, 20 अगस्त । मोक्ष की नगरी काशी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से जनजीवन के साथ-साथ मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है। बढ़ते जलस्तर के कारण शवदाह के लिए आने वाले परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।मणिकर्णिका घाट पर मोक्ष की कामना लेकर दूर-दराज से लोग अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं। जलस्तर बढ़ने से घाट का निचला शवदाह स्थल पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिसके कारण छत पर चिताएं जलाई जा रही हैं। वहीं हरिश्चंद्र घाट पर भी गली में चिताएं सजाकर अंतिम संस्कार कराया जा रहा है।
हालांकि काशी में यह स्थिति नई नहीं है। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर हर वर्ष इस प्रकार की परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं।चंदौली से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे मोनू पटेल ने बताया कि शवदाह के लिए डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि घाट का निचला प्लेटफॉर्म पूरी तरह डूब चुका है, जिससे छत पर अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। सोहन यादव ने बताया कि वह अपने परिजन का शव सोनभद्र से लेकर आए हैं। काफी देर इंतजार के बाद उन्हें छत पर चिता लगवाने का अवसर मिला।
मणिकर्णिका घाट पर शवदाह कराने वाले डोम समाज के कल्लू चौधरी ने बताया कि सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन औसतन 40 से 50 शव अंतिम संस्कार के लिए आते हैं और कई बार यह संख्या 100 से अधिक भी हो जाती है। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में कोई विशेष परेशानी नहीं होती, लेकिन इस समय निचला शवदाह स्थल पूरी तरह जलमग्न होने के कारण लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है।केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गुरुवार को वाराणसी में गंगा का जलस्तर 68.35 मीटर दर्ज किया गया, जो स्थिर बना हुआ है। गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर, खतरे का स्तर 71.262 मीटर तथा सर्वोच्च बाढ़ स्तर 73.901 मीटर निर्धारित है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे बना हुआ है।