
कानपुर, 24 अगस्त । उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में एआरटीओ कार्यालय में दलालों की सक्रियता और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद सोमवार को प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने औचक छापेमारी की।जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर हुई कार्रवाई में कार्यालय परिसर और आसपास सक्रिय मिले 11 संदिग्ध दलालों को पकड़ा गया। उनसे पूछताछ कर उनकी भूमिका और कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों से संभावित संबंधों की जांच की जा रही है।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर अनुभव सिंह और एडीसीपी दक्षिण सुमित सुधाकर राम टेके के नेतृत्व में संयुक्त टीम अचानक एआरटीओ कार्यालय पहुंची और परिसर में मौजूद लोगों का सत्यापन शुरू किया। टीम ने वाहन पंजीकरण, वाहन पोर्टल, ड्राइविंग लाइसेंस और सारथी पोर्टल से संबंधित सेवाओं की कार्यप्रणाली की जांच की।इस दौरान संदिग्ध रूप से मौजूद लोगों से उनके कार्यालय आने और कराए जा रहे कार्यों के संबंध में पूछताछ की गई। जांच के दौरान 11 लोगों को संदिग्ध दलाल के रूप में चिह्नित कर हिरासत में लिया गया। पुलिस उनसे यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वे आवेदकों के संपर्क में कैसे आते थे और कार्यालय में उनके काम किस प्रकार कराते थे।
प्रशासनिक टीम ने वाहन पंजीकरण, स्वामित्व अंतरण, कर एवं शुल्क, फिटनेस, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, लर्नर लाइसेंस और ड्राइविंग टेस्ट से जुड़े अभिलेखों की भी जांच की। कार्यालय में उपलब्ध नकदी का रजिस्टर, शुल्क प्राप्तियों और संबंधित अभिलेखों का मिलान कराया गया। प्रारंभिक जांच में नकदी और लेखा-अभिलेखों के मिलान में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं। संबंधित रिकॉर्ड का दोबारा मिलान कर विसंगतियों के कारण और जिम्मेदारी निर्धारित की जा रही है।जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि पकड़े गए संदिग्ध बिचौलियों की कार्यालय के भीतर किस स्तर तक पहुंच थी और क्या उन्हें किसी अधिकारी या कर्मचारी का संरक्षण अथवा सहयोग प्राप्त था। यदि जांच में किसी कार्मिक की संलिप्तता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि नागरिकों को सरकारी सेवाएं निर्धारित प्रक्रिया, समयसीमा और शुल्क के अनुसार सीधे उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संदिग्धों की भूमिका और सामने आई वित्तीय विसंगतियों की गहन जांच कराई जा रही है। किसी अधिकारी या कर्मचारी की बिचौलियों से मिलीभगत अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।