जन्माष्टमी पर 500 ड्रोन से आसमान में दिखेगी कृष्ण लीला

जन्माष्टमी पर 500 ड्रोन से आसमान में दिखेगी कृष्ण लीला

मथुरा, 24 अगस्त। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इस बार जन्माष्टमी का उत्सव श्रद्धा और आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम का साक्षी बनेगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर चार सितंबर की रात 500 ड्रोन के जरिए आसमान में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी लीलाओं का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा।उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) लक्ष्मी नागप्पन ने बताया कि परिषद की ओर से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में चार सितंबर की रात नौ से 10 बजे के बीच करीब 15 मिनट का ड्रोन शो आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 500 ड्रोन एक साथ आसमान में उड़कर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी विभिन्न लीलाओं से जुड़ी आकृतियां और दृश्य प्रदर्शित करेंगे। यह शो करीब तीन से चार किलोमीटर के दायरे में दिखाई देगा, जिससे जन्मभूमि के आसपास मौजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी इसका आनंद ले सकेंगे।सीईओ ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण ने इसी पावन भूमि पर कंस के कारागार में अवतार लेकर अधर्म के अंत और धर्म की स्थापना का संदेश दिया था। जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में जन्मभूमि मंदिर में होने वाले जन्माभिषेक के दर्शन के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि इस बार श्रद्धालुओं को जन्माभिषेक के साथ आसमान में ड्रोन के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी लीलाओं के दर्शन का भी अवसर मिलेगा।धार्मिक आयोजनों में ड्रोन शो का प्रयोग आकर्षण का नया माध्यम बन रहा है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर ड्रोन के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का प्रदर्शन किया जा चुका है। गुजरात के सोमनाथ मंदिर परिसर में भी ड्रोन शो के माध्यम से सोमनाथ के इतिहास, भगवान शिव और भारतीय संस्कृति से जुड़े दृश्य प्रदर्शित किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश में अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी में भी ड्रोन शो आयोजित हो चुके हैं। ऐसे में मथुरा में जन्मभूमि की पृष्ठभूमि में 500 ड्रोन के जरिए कृष्ण जन्म और उनकी लीलाओं का प्रदर्शन धार्मिक पर्यटन और आधुनिक तकनीक के समन्वय की दिशा में एक नया प्रयोग माना जा रहा है।

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