
काठमांडू, 26 अगस्त । नेपाल ने बुधवार को उत्तरी ज़िलों में आई विनाशकारी बाढ़ से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग जुटाने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं और विश्व बैंक ने 25 अरब रुपये की आपातकालीन सहायता की पेशकश की है वहीं भारत नेपाल को आर्थिक एवं ज़रूरी सामान की मदद कर रहा है।नेपाल में अचानक आयी भयानक बाढ़ में कम से कम 95 लोगों की मौत हो गयी है तथा मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। विदेशी नागरिकों समेत सैकड़ों पर्यटक लापता हैं।
नेपाल मंत्रिमंडल ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग के बाढ़ प्रभावित स्थानीय इलाकों को आपदा ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है, जिससे सरकार को संसाधन जुटाने और तत्काल आधार पर घरेलू व अंतरराष्ट्रीय सहायता का समन्वय करने की अनुमति प्राप्त हो गयी है।यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बाढ़ ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और ज़रूरी सेवाओं को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है, जिससे प्रभावित समुदायों को तुरंत राहत के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए मदद की आवश्यकता है।नेपाल के लिए विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर डेविड सिस्लेन ने आपदा की खबर मिलने के बाद बुधवार सुबह करीब 10:35 बजे वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले से संपर्क किया और बताया कि विश्व बैंक अलग-अलग वित्त चैनलों के माध्यम से 25 अरब रुपये तक की आपातकालीन सहायता देने के लिए तैयार है। इस प्रस्तावित मदद से नेपाल को तुरंत कार्रवाई करने में सहायता मिलने और क्षतिग्रस्त अवसंरचना एवं ज़रूरी सार्वजनिक सेवाओं की बहाली के लिए धन मिलने की उम्मीद है क्योंकि सरकार तबाही का विस्तृत आकलन कर रही है।
विश्व बैंक का शुरुआती हस्तक्षेप इसलिए भी अहम है क्योंकि इस आपदा का दायरा नेपाल के सरकारी संसाधनों पर काफी दबाव डालने वाला है, खासकर तब जब देश बचाव एवं राहत कार्यों से उबरने की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है।भारत ने नेपाल को तुरंत मानवीय सहायता प्रदान करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। भारत सरकार ने नेपाल से बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए तुरंत ज़रूरी राहत सामग्री की सूची मांगी है ताकि सामान जल्द से जल्द भेजा जा सके।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद वहां के लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और कहा कि भारत इस मुश्किल समय में नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि सरकार की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत पहल के तहत, भारतीय वायु सेना के विमान से नेपाल को दवाइयों और राशन जैसी राहत सामग्री भेजी जाएगी।नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, वित्त मंत्री एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर बुधवार को काठमांडू में राहत सामग्री लाने की तैयारी चल रही है।
चीन ने नेपाल को तुरंत आर्थिक मदद देने की भी इच्छा व्यक्त की है। अधिकारियों के अनुसार, चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने वित्त मंत्रालय के ज़रिए नेपाल सरकार से धन स्थानांतरण करने की ज़रूरी प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है।नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने भारत, चीन और नेपाल के विकास सहयोगियों को उनकी त्वरित प्रतिक्रिया एवं प्रतिबद्धताओं के लिए धन्यवाद दिया, साथ ही सहायता के समन्वय और उपयोग के लिए एक प्रभावी तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।
नेपाल सरकार अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ आर्थिक मदद, राहत सामग्री और अन्य तरह की सहायता प्राप्त करने, बांटने और इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर बातचीत कर रही है।इस बीच, दुनिया भर के नेताओं ने नेपाल के लोगों के साथ एकजुटता दिखाई है और आपदा से प्रभावित देश को राहत सामग्री भेजना शुरू कर दिया है।
नेपाल में अमेरिकी दूतावास ने रसुवा ज़िले में बाढ़ से हुई जान-माल की हानि पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।अमेरिकी दूतावास ने रासुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और तनाहुन में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से यह भी अपील की कि वे प्रभावित इलाकों में जाने से बचें, नदी के किनारों और निचले इलाकों से दूर रहें, ऊंचे स्थानों पर जाएं और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
इसके अलावा, दक्षिण कोरियाई प्रवक्ता के अनुसार, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने बाढ़ से निपटने के लिए पूरी ताकत से बचाव अभियान चलाने का आदेश दिया। ली ने दक्षिण कोरियाई सरकार को निर्देश दिया कि वह नेपाली सरकार और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हुए अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।