
बेंगलुरु, 26 अगस्त। अर्शदीप सिंह तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। वह अब तक 18 वनडे और 91 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं, लेकिन टेस्ट पदार्पण का इंतजार अभी भी जारी है। व्यस्त सीमित ओवरों के कार्यक्रम के कारण उन्हें अपने 22वें और 23वें प्रथम श्रेणी मैच के बीच पूरे एक साल का इंतजार करना पड़ा। अर्शदीप 2026 दलीप ट्रॉफ़ी के क्वार्टर फ़ाइनल में यह परखने उतरे थे कि क्या वह चार दिवसीय क्रिकेट की मांगों के साथ तालमेल बिठा सकते हैं। उन्होंने 53 रन देकर तीन और 40 रन देकर एक विकेट लिया और वेस्ट ज़ोन पर नॉर्थ ज़ोन की 52 रन की जीत में अहम भूमिका निभाई। यह मैच बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में खेला गया।
मैच के बाद अर्शदीप ने कहा, “मुझे बहुत कम मौकों पर लाल गेंद की क्रिकेट खेलने का मौक़ा मिलता है। मैं अपनी स्किल्स दिखाना चाहता था और यह देखना चाहता था कि मैं कितने ओवर गेंदबाज़ी कर सकता हूं। लय अच्छी महसूस हो रही है। काफ़ी समय बाद लाल गेंद के साथ मैच खेला। मैंने अभ्यास में काफ़ी घंटे लगाए थे और अच्छा लगा। शरीर में दर्द है, लेकिन यह अच्छा दर्द है क्योंकि हम मैच जीत गए।”
क्रिकेट के सबसे बड़े फ़ॉर्मेट में वापसी करने के लिए अर्शदीप ने अपनी तैयारियों में काफ़ी समय बिताया और जब मैदान पर उतरे तो इसके लिए तैयार भी दिखे। उनका मानना है कि लाल गेंद के क्रिकेट में वापसी के काफ़ी मौक़े मिलते हैं और यही उन्हें सबसे ज़्यादा पसंद है। उन्होंने कहा, “(लाल या सफ़ेद गेंद से अभ्यास करने का फै़सला) इस बात पर निर्भर करता है कि आगे क्या आने वाला है। इस बार मुझे पता था कि दलीप ट्रॉफ़ी आने वाली है, इसलिए मैं लाल गेंद से अभ्यास कर रहा था। जब सीमित ओवर क्रिकेट का सीज़न आता है तो आप सफे़द गेंद से अभ्यास करते हैं। ट्रेनिंग पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि आपके सामने किस तरह का सीज़न आने वाला है।”उन्होंने कहा, “हमारे मुख्य कोच अजय शर्मा ने मुझसे कहा था कि ‘अगर नई गेंद से विकेट नहीं भी मिले तो दूसरे स्पेल में वापसी का मौक़ा रहेगा।’ लाल गेंद के क्रिकेट की खूबसूरती यही है कि यह आपको दोबारा मौक़ा देता है।”अर्शदीप ने 2023 में केंट के लिए काउंटी चैम्पियनशिप के पांच मैच खेले थे। बीसीसीआई की ओर से उन्हें यही संदेश मिला है कि लाल गेंद की क्रिकेट में जहां भी मौका मिले, प्रदर्शन करो और “जब सही समय आएगा, तुम्हें मौक़ा मिलेगा।”
अर्शदीप ने कहा, “जब भी मौक़ा मिले और समय हो कि आप वहां (इंग्लैंड जाकर काउंटी क्रिकेट) खेल सकें, तो वह बहुत अच्छा अनुभव होता है। लेकिन अब आईपीएल, घरेलू सीमित ओवर के सीज़न और घरेलू क्रिकेट के चलते वहां जाकर खेलना आसान नहीं है। यहां भी महत्वपूर्ण मैच खेले जा रहे होते हैं। हम अपने घरेलू क्रिकेट को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उसका स्तर नीचे न जाए। इसलिए हम यहां खेलना चुनते हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं।”
वेस्ट ज़ोन के ख़िलाफ़ उन्हें बादलों से ढकी परिस्थितियां जरूर मिलीं, लेकिन बेंगलुरु और इंग्लैंड की परिस्थितियों में समानता वहीं समाप्त हो गई। लाल मिट्टी की पिच ने स्पिनरों को अधिक मदद दी और अर्शदीप को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा। उन्होंने कहा, “ऐसी विकेटों पर आपको दिमाग़ से खेलना पड़ता है। कभी सफलता मिलती है, कभी सामने वाला बल्लेबाज़ आपके ख़िलाफ़ बड़ा शॉट खेल देता है। आपको दोनों चीजें स्वीकार करनी होती हैं और लगातार कोशिश करते रहना होता है।”उन्होंने ऐसा किया भी और पहली पारी में मुशीर खान का विकेट शानदार तरीके से हासिल किया। मुशीर 125 गेंदों पर 31 रन बनाकर डटे हुए थे। तब अर्शदीप ने राउंड द विकेट आकर ऑफ़ साइड पर क़रीबी फ़ील्ड सजाई। वहां वाइड स्लिप, गली, शॉर्ट मिड-ऑफ़, शॉर्ट कवर और थोड़ा पीछे कवर मौजूद था। इतने दबाव भरे दृश्य के बीच उन्होंने पटकी हुई गेंद फेंकी, अतिरिक्त उछाल हासिल की और मुशीर को कैच आउट कराया।
अर्शदीप ने कहा, “उस पिच में तेज़ गेंदबाज़ों के लिए कुछ भी नहीं था। पूरी तरह स्पिनरों का दबदबा था। मैं बस मुशीर के दिमाग़ से खेलना चाहता था। वह बहुत रक्षात्मक बल्लेबाज़ी कर रहा था, इसलिए हम चाहते थे कि फ़ील्डर उसकी आंखों के सामने रहें और उसे लगे कि हम कुछ अलग करने वाले हैं। लेकिन हम लगातार एक ही लाइन और लेंथ पर गेंदबाज़ी करते रहे और उसने एक गेंद पर हमें मौक़ा दे दिया।