भारत-अमेरिका ने 100 से अधिक टैंक रोधी जैवलिन मिसाइल प्रणालियों के लिए 4.5 करोड़ डॉलर का सौदा किया

भारत-अमेरिका ने 100 से अधिक टैंक रोधी जैवलिन मिसाइल प्रणालियों के लिए 4.5 करोड़ डॉलर का सौदा किया

नयी दिल्ली 28 अगस्त। भारत और अमेरिका ने भारतीय सेना के लिए 100 से अधिक टैंक रोधी गाइडेड जैवलिन मिसाइल प्रणालियों की खरीद के लिए 4.5 करोड़ डॉलर से अधिक के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।यह दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और उनके रक्षा उद्योगों के बीच गहरे सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

भारत ने अमेरिकी विदेशी सैन्य बिक्री (एफएमएस) प्रक्रिया के माध्यम से जैवलिन टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए अमेरिका के साथ लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (एलओए ) पर हस्ताक्षर किए हैं।भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में भारत द्वारा “युद्ध-परीक्षित” जेवलिन एंटी-टैंक प्रणाली की प्रस्तावित खरीद को “बड़ी खबर” बताया और कहा कि यह कदम अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत है।

श्री गोर ने कहा कि यह “अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है और सह-उत्पादन की संभावनाओं का रास्ता खोलता है।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध “रिकॉर्ड उच्च स्तर” पर हैं।उन्होंने इस वर्ष मई में शांगरी-ला डायलॉग में अमेरिका के रक्षा मंत्री की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रस्तावित खरीद भारत और अमेरिका के बीच अधिक रक्षा औद्योगिक सहयोग और सह-उत्पादन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

भारत में अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावासों ने भी एलओए पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और कहा कि यह समझौता अमेरिकी और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच स्थायी साझेदारी को दर्शाता है तथा दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच भविष्य के सहयोग के अवसर पैदा करता है।श्री गोर ने कहा, “यह समझौता ऐसी रक्षा साझेदारी को दर्शाता है जो अधिक गहरी, अधिक सक्षम और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।” उन्होंने कहा कि जैवलिन समझौता भारतीय सेना के लिए अमेरिकी समर्थन की मजबूती को प्रदर्शित करता है और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के लिए साथ मिलकर काम करने के नए अवसर पैदा करता है उन्होंने कहा, “हम भविष्य के सहयोग की अपार संभावनाएं देखते हैं, जो दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करता है।”

जैवलिन प्रणाली एक उन्नत मध्यम दूरी की, ‘फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल’ है, जिसे बख्तरबंद वाहनों और मजबूत ठिकानों सहित कई प्रकार के लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।इस प्रणाली का इस्तेमाल अमेरिकी सेना, अमेरिकी मरीन कोर और कई अंतरराष्ट्रीय ग्राहक करते हैं। जैवलिन प्रणाली का उत्पादन ‘जैवलिन ज्वाइंट वेंचर’ द्वारा किया जाता है, जो आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन के बीच साझेदारी है।

अमेरिकी दूतावास ने कहा कि यह समझौता अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी को और मजबूत करता है और पारस्परिक रूप से लाभकारी सह-उत्पादन के साथ-साथ दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के अतिरिक्त अवसरों पर चर्चा का रास्ता खोलता है।इस सौदे पर पिछले वर्ष नवम्बर में उस समय हस्ताक्षर किये गये थे। गत 19 नवंबर को अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की थी कि उसने संभावित बिक्री को मंजूरी देने का निर्णय लिया है। इसके बाद डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी ने अमेरिकी कांग्रेस को आवश्यक प्रमाणन सौंपा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Designed and Developed by Prakhar Dixit