
वाशिंगटन/तेहरान, 28 अगस्त। अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ को लगातार कमजोर किया है।ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमताओं के खिलाफ शुरू हुआ यह अभियान अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर नियंत्रण पाने की अनिश्चितकालीन लड़ाई में तब्दील हो गया है। फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से यह जलमार्ग ईरान के लिए दबाव बनाने और सौदेबाजी करने के लिए सबसे बड़ी ताकत रहा है।
अमेरिका का मानना है कि हॉर्मुज में बदलती स्थिति युद्ध का निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम होगा और भविष्य की किसी भी बातचीत में उसकी स्थिति मजबूत होगी।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक्सियोस को दिये फोन साक्षात्कार में कहा, “वह समुद्री मार्ग अब खुल चुका है। ईरान की प्रतिक्रिया बहुत हल्की है। वे नहीं चाहते कि हम उन पर फिर हमला करें। असली खेल यही है, बाकी बातें बेमानी हैं।”
युद्ध की शुरुआत में हॉर्मुज मार्ग खुला हुआ था, वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य रूप से चल रही थी और ब्रेंट क्रूड लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल पर बिक रहा था।दो इजरायली अधिकारियों के अनुसार, आईआरजीसी नौसेना के तत्कालीन कमांडर जनरल अली रजा तंगसिरी ने जलमार्ग बंद करने की पहल की थी। युद्ध के शुरुआती 72 घंटों में ही ईरान ने इस मार्ग को बंद करने की घोषणा की और वहां से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले की चेतावनी दी।
इजरायली-अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद श्री तंगसिरी ने ईरानी बलों को मुख्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने का आदेश दिया। इसके तीन हफ्ते बाद बंदर अब्बास में हुए एक इजरायली हवाई हमले में हालांकि श्री तंगसिरी मारे गये।हमलों और बारूदी सुरंगों के खतरे ने हॉर्मुज में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लगभग रोक दिया। इसके चलते ब्रेंट क्रूड उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भारी संकट मंडराने लगा।
अमेरिका में ईंधन के दामों में आयी भारी बढ़ोतरी और ऊर्जा बाजारों के दबाव के मद्देनजर श्री ट्रंप आठ अप्रैल को युद्धविराम पर सहमत हुए। ईरान दरअसल ऐसा ही आर्थिक संकट पैदा करना चाहता था।दो महीने बाद हस्ताक्षर किये गये अमेरिका-ईरान सहमति पत्र का मुख्य बिंदु हॉर्मुज खोलना ही था। यह जलमार्ग हालांकि कभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका और जल्द ही यह समझौता टूट गया।
समझौता रद्द होने के बाद अमेरिकी सेना ने खुद इस मार्ग को खोलने का काम शुरू किया। संयुक्त अरब अमीरात के सहयोग से बने अमेरिकी कार्यबल ने हवाई सुरक्षा देने के साथ-साथ ईरानी ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को नाकाम कर दक्षिणी चैनल से व्यापारिक जहाजों को निकालना शुरू किया।दो हफ्ते तक चले अमेरिकी बमबारी अभियान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करने की आईआरजीसी की क्षमता को काफी कमजोर कर दिया।
इसी बीच अमेरिका ने नौसेना गोताखोरों, सील कमांडो, आधुनिक ड्रोनों और निजी ठेकेदारों के सहयोग से व्यापक बारूदी सुरंग हटाओ अभियान चलाया और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी भी बहाल कर दी।अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन साझा प्रयासों से जलडमरूमध्य की स्थिति बदल गयी है। यद्यपि जहाजों की आवाजाही और तेल का परिवहन युद्ध-पूर्व स्तर से काफी कम है, फिर भी अब इस जलमार्ग पर ईरान का पहले जैसा नियंत्रण नहीं रहा और अधिकतर हिस्से पर अमेरिकी सेना की पकड़ मजबूत हो गयी है।
यद्यपि ईरान अब भी जहाजों पर गोलाबारी कर रहा है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार उसकी सटीक निशाना लगाने की क्षमता सीमित हुई है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पिछले महीने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों में से केवल 2 प्रतिशत ही हमले की जद में आये।मुख्य जलमार्ग से 200 से अधिक संदिग्ध वस्तुएं हटायी गयी हैं। इनमें से केवल 11 के वास्तविक बारूदी सुरंग होने की पुष्टि हुई और उनमें से भी कुछ ही सही तरीके से बिछायी गयी थीं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हाल के हफ्तों में हर रात 20 से 30 टैंकर दक्षिणी चैनल से गुजर रहे हैं, जो औसतन 90 लाख से एक करोड़ बैरल तेल ले जाते हैं। यह मात्रा युद्ध से पहले इस मार्ग से होने वाले कुल परिवहन की लगभग आधी है।सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने गुरुवार रात जारी एक वीडियो में कहा, “हमने हॉर्मुज में बड़ी कामयाबी हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त समुद्री मार्ग अब ईरानी बारूदी सुरंगों से मुक्त हैं। मुख्य बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग खुल चुके हैं और आवाजाही गति पकड़ रही है।”
तेल विश्लेषकों और जहाजों की निगरानी करने वाली एजेंसियों ने हालांकि अमेरिकी आंकड़ों पर सवाल उठाये हैं। खुद अमेरिकी अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि कुछ जहाजों की आवाजाही दर्ज होने से छूट सकती है।जलमार्ग को सुरक्षित बताने के अमेरिकी दावों के बावजूद, टैंकरों पर मिसाइल हमलों की लगातार आती रिपोर्टों से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर सवाल बने हुए हैं।
इसके बावजूद, इस मार्ग से तेल निर्यात बढ़ाने की अमेरिकी कोशिशों को क्षेत्रीय सहयोगियों का साथ मिल रहा है। यूएई, बहरीन और कुवैत इस अभियान में शामिल हो चुके हैं तथा सऊदी अरब के भी जुड़ने की उम्मीद है।अमेरिका को उम्मीद है कि कतर जल्द ही उसके संरक्षित मार्ग से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर भेजना शुरू कर देगा।
अमेरिकी अधिकारी मध्य सितंबर तक मुख्य जलमार्ग का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं, ताकि हर रात कम से कम 50 जहाज खाड़ी में आ-जा सकें। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य युद्ध-पूर्व के 60-70 प्रतिशत तेल निर्यात को बहाल करना है।इसी बीच, क्षेत्र में एक बार फिर कूटनीतिक हलचल के संकेत मिले हैं।
क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार ईरान ने हाल के दिनों में बातचीत में दिलचस्पी दिखायी है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता बहाल करने के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने रविवार को ईरान का दौरा किया। इसके बाद ओमान के विदेश मंत्री ने भी ईरानी अधिकारियों से हॉर्मुज की व्यवस्था पर चर्चा की।ईरान के अनुरोध पर अमेरिका और उसके बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर के प्रधानमंत्री ने भी गुरुवार को तेहरान की यात्रा की।
सार्वजनिक रूप से ईरान हालांकि अपने पुराने रुख पर कायम है और अमेरिका से जून के सहमति पत्र को लागू करने तथा मार्ग खोलने की शर्तों पर सहमत होने की मांग कर रहा है।दूसरी ओर श्री ट्रंप ने बातचीत में कोई दिलचस्पी न होने की बात कही है। श्री ट्रंप ने गुरुवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मैं उनसे नहीं मिलना चाहता, वे मिलना चाहते हैं। वास्तव में वे समझौते के लिए गुहार लगा रहे हैं।”
श्री ट्रंप के इस कड़े रुख के बावजूद ह्वाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ कतर और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के साथ चर्चा में लगे हुए हैं।अमेरिकी वार्ताकार यह आंकलन कर रहे हैं कि क्या नौसैनिक नाकेबंदी, आर्थिक दबाव और हॉर्मुज पर अमेरिका का बढ़ता नियंत्रण अंततः ईरान को अपनी मांगें नरम करने पर मजबूर कर देगा।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि जलमार्ग में शक्ति संतुलन बदलने से भविष्य की वार्ताओं में ट्रंप प्रशासन का पलड़ा भारी हुआ है। वे 17 जून के सहमति पत्र को अब अप्रासंगिक मान रहे हैं और हॉर्मुज के प्रबंधन पर ईरान-ओमान वार्ता को अमेरिकी प्रयासों के सामने गौण मान रहे हैं।