
प्रयागराज, 1 सितंबर । उत्तर प्रदेश के संगम नगरी प्रयागराज में लगातार बारिश के चलते गंगा और यमुना नदियां एक बार फिर उफान पर हैं। जलस्तर में प्रति घंटे हो रही वृद्धि से शहर के तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बढ़ते जलस्तर के कारण कई घाटों का संपर्क टूटने लगा है और स्थिति धीरे-धीरे चिंताजनक होती जा रही है।सिंचाई विभाग के अनुसार प्रयागराज में नदियों के खतरे का निशान 84.734 मीटर निर्धारित है। मंगलवार सुबह आठ बजे दर्ज आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों में नदियों के जलस्तर में 19 से 23 सेंटीमीटर तक की वृद्धि हुई है। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.88 मीटर पहुंच गया है, जो पिछले 24 घंटे में 20 सेंटीमीटर बढ़ा है। छतनाग में गंगा 81.97 मीटर पर बह रही है और यहां 19 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। एसटीपी बख्शी बांध केंद्र पर जलस्तर 82.49 मीटर दर्ज किया गया, जहां 23 सेंटीमीटर की सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई है। नैनी में यमुना का जलस्तर 82.39 मीटर पहुंच गया है, जो पिछले 24 घंटे में 19 सेंटीमीटर अधिक है।
नदियों के उफान का असर शहर के प्रमुख घाटों पर दिखाई देने लगा है। प्रसिद्ध रसूलाबाद घाट पूरी तरह जलमग्न हो गया है और नदी का पानी श्मशान घाट के ऊपरी हिस्सों तक पहुंच गया है। घाट के डूबने से अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध सूखी जगह काफी कम रह गई है। जलस्तर में वृद्धि की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।राहत की बात यह है कि जिले के सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं। सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखे हुए हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, जबकि पुलिस-प्रशासन को तटीय क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।